कोरबा | छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में धान खरीदी का सीजन बीत जाने के बाद भी लापरवाही की तस्वीरें सामने आ रही हैं। जहाँ एक ओर जिले के अधिकांश धान उपार्जन केंद्रों से धान का उठाव (lifting) शत-प्रतिशत पूर्ण हो चुका है, वहीं अखरापाली फड़ में अभी भी लगभग 400 से 500 कट्टी धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है।
अव्यवस्थित ढंग से बिखरी हैं बोरियां
आदिम जाति सेवा सहकारी समिति अखरापाली के फड़ में धान की बोरियां बेहद अव्यवस्थित तरीके से फैली हुई हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष केंद्र में लगभग 61,660 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी। नियमतः समय पर उठाव हो जाना चाहिए था, लेकिन यहाँ स्थिति इसके उलट है। उचित रखरखाव और देखरेख के अभाव में धान के खराब होने का खतरा काफी बढ़ गया है।
अधिकारियों का पक्ष: ‘सफाई के बाद होगा उठाव‘
जब इस देरी के संबंध में जिला विपणन अधिकारी ऋतुराज देवांगन से संपर्क किया गया, तो उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया:
“केंद्र में वर्तमान में जो धान शेष है, वह मिलर्स का है। उक्त धान को साफ-सफाई की आवश्यकता है। जैसे ही साफ-सफाई का कार्य पूर्ण होगा, उसका उठाव कर लिया जाएगा।”
चिंता का विषय
प्रशासनिक दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि धान खुले में पड़ा है। मौसम के बदलाव या नमी के कारण यदि अनाज खराब होता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? ग्रामीणों और किसानों में इस अव्यवस्था को लेकर रोष है, क्योंकि एक तरफ जिले के अन्य केंद्र खाली हो चुके हैं और अखरापाली में अभी भी सैकड़ों कट्टे उठाव की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु:
- शेष स्टॉक: 400 से 500 कट्टी धान।
- कुल खरीदी: 61,660 क्विंटल।
- खतरा: नमी और अव्यवस्था से धान की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका।

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