जांजगीर-चांपा। जिले में कानून व्यवस्था की स्थिति पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। जहाँ एक तरफ राज्य शासन अपराध मुक्त समाज का दावा करता है, वहीं जांजगीर में पुलिस की कथित सुस्ती ने एक पीड़ित परिवार को दहशत के साये में जीने पर मजबूर कर दिया है। मामला जानलेवा हमले और उसके बाद मिल रही निरंतर धमकियों से जुड़ा है, जिसमें पुलिस की कार्यप्रणाली अब जांच के घेरे में है।

क्या है पूरा मामला?
2 मार्च 2026 को रविदास चौक के पास अमन आर्यन सिंह राठौर पर जावेद खान, आदिल खान और रेहान खान द्वारा जानलेवा हमला किया गया था। इस मामले में पुलिस ने बी.एन.एस. (BNSS) की धारा 109(1), 296, 351(3), 115(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया था।
जमानत मिलते ही बढ़ी दबंगई
चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्य आरोपी जावेद खान को जमानत मिलने के बाद उसके हौसले और बुलंद हो गए हैं। पीड़ित अमन राठौर ने पुलिस अधीक्षक (SP) को सौंपे अपने शिकायती पत्र में आरोप लगाया है कि आरोपी जावेद खान उसे फोन नंबर 7691487892 से लगातार कॉल कर केस वापस लेने (राजीनामा करने) का दबाव बना रहा है। अमन का दावा है कि आरोपी उसे खुलेआम कह रहा है— “राजीनामा नहीं किया तो जान से मार डालूँगा, मुझे तत्काल जमानत मिल जाएगी।”
पुलिस की भूमिका पर तीखे सवाल
पीड़ित ने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि उसने इस धमकी के बारे में थाना प्रभारी जांजगीर और चौकी नैला को लिखित सूचना दी थी, लेकिन पुलिस ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
पुलिस पर उठते सवाल:
- दो आरोपी अब भी फरार क्यों? घटना के बाद से ही आदिल खान और रेहान खान फरार बताए जा रहे हैं। क्या पुलिस उन्हें पकड़ने में नाकाम है या उन्हें संरक्षण मिल रहा है?
- धमकियों के बाद भी खामोश क्यों है पुलिस? जब पीड़ित ने मोबाइल नंबर के साथ धमकी की शिकायत की, तो साइबर सेल के माध्यम से अब तक जांच क्यों नहीं शुरू की गई?
- क्या किसी अनहोनी का इंतजार है? यदि आरोपी अपनी धमकी को अंजाम दे देता है, तो क्या जांजगीर पुलिस इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेगी?
महकमे में हड़कंप की स्थिति
पीड़ित द्वारा सीधे पुलिस अधीक्षक से की गई शिकायत और पुलिस की सुस्ती के उजागर होने के बाद अब निचले स्तर के अधिकारियों में खलबली मच गई है। एक तरफ आरोपी सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कानून का पालन करने वाला नागरिक अपनी सुरक्षा के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है।
अब देखना यह होगा कि जांजगीर पुलिस इस मामले में कोई कड़ा कदम उठाती है या फिर ‘रसूख’ के आगे खाकी यूँ ही बेबस नजर आती रहेगी।

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