रायपुर: छत्तीसगढ़ की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संयुक्त मंच के आह्वान पर प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में 26 और 27 फरवरी 2026 को दो दिवसीय ‘काम बंद’ हड़ताल और जिला स्तरीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया जा रहा है।
बजट से निराशा, सरकार पर लगाया अनदेखी का आरोप
आंदोलनकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार के 2026-27 के बजट और राज्य सरकार के बजट, दोनों में ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सुध नहीं ली गई है। आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि शासकीयकरण, न्यूनतम वेतन और पेंशन जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार ने चुप्पी साध रखी है, जिससे देश की करीब 28 लाख और छत्तीसगढ़ की 1 लाख कार्यकर्ताओं में भारी रोष है।
प्रमुख मांगें जिन पर अड़ा है संयुक्त मंच:
कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर तीन मुख्य बिंदु रखे हैं:
शासकीय कर्मचारी का दर्जा: शिक्षा और पंचायत कर्मियों की तर्ज पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी नियमित कर शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाए।
न्यूनतम वेतन की गारंटी: नियमित होने तक कार्यकर्ताओं को ₹26,000 और सहायिकाओं को ₹22,100 प्रतिमाह वेतन दिया जाए। साथ ही, मध्य प्रदेश की तर्ज पर हर साल ₹1,000 की वेतन वृद्धि सुनिश्चित हो।
सामाजिक सुरक्षा: सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन, ग्रेच्युटी और आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में बीमा लाभ के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए।
संयुक्त मंच ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 8 मार्च तक उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इसी कड़ी में 9 मार्च 2026 को प्रदेशभर की एक लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं राजधानी रायपुर कूच करेंगी और विधानसभा का घेराव करेंगी।
“महोदय, इस तरह महिला सशक्तिकरण नहीं हो सकता। हम हतोत्साहित हैं और मांगें पूरी होने तक अपना हक मांगते रहेंगे।” – संयुक्त मंच के प्रतिनिधि

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