पलारी (छत्तीसगढ़): बलौदाबाजार जिले के पलारी थाना क्षेत्र के ग्राम छेरकाडीह जारा में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ सर्दी-खांसी का इलाज कराने गई 4 महीने की गर्भवती महिला की एक झोलाछाप डॉक्टर (जो गांव का सरपंच भी है) के क्लिनिक में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम छेरकाडीह जारा निवासी अजय साहू की पत्नी इंदु साहू (24) दूसरी बार मां बनने वाली थी। गुरुवार को सर्दी-खांसी और सीने में दर्द की शिकायत होने पर वह गांव के ही डॉक्टर जयंत साहू के पास गई थी। बताया जा रहा है कि डॉक्टर के पास कोई वैध डिग्री नहीं है, फिर भी वह पिछले 17 वर्षों से अवैध रूप से क्लिनिक चला रहा है।
इंजेक्शन के बाद बिगड़ी तबीयत?
प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के अनुसार, क्लिनिक में इलाज के दौरान महिला को संभवतः कोई इंजेक्शन लगाया गया, जिसके तुरंत बाद उसे उल्टियां होने लगीं और वह बेहोश हो गई। हालांकि, आरोपी डॉक्टर जयंत साहू ने इंजेक्शन की बात से इनकार करते हुए कहा कि महिला ने खाना नहीं खाया था और बीपी चेक करने के दौरान ही उसकी तबीयत बिगड़ गई।
“मेरे पास कोई डॉक्टरी डिग्री नहीं है, लेकिन मैं 17 साल से प्रैक्टिस कर रहा हूँ। महिला को चक्कर आया और वह गिर गई।” – जयंत साहू (आरोपी झोलाछाप डॉक्टर/सरपंच)
अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत
जब महिला की हालत गंभीर हुई, तो उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पलारी ले जाया गया। वहाँ ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे ‘ब्रॉट डेड’ (अस्पताल पहुंचने से पहले मृत) घोषित कर दिया। बीएमओ डॉ. पंकज वर्मा ने बताया कि मृतका के नाक से झाग और खून निकल रहा था, जो किसी गंभीर रिएक्शन या स्थिति की ओर इशारा करता है।
बिना पोस्टमॉर्टम के अंतिम संस्कार, उठ रहे सवाल
हैरानी की बात यह है कि इतनी संदिग्ध मौत के बावजूद परिजनों ने पुलिस कार्रवाई या पोस्टमॉर्टम कराने से मना कर दिया।
4 घंटे तक चर्चा: अस्पताल में परिजन करीब 4 घंटे तक आपसी विचार-विमर्श करते रहे।
लिखित आवेदन: शाम 6 बजे परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन को लिखित आवेदन देकर पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया और शव लेकर चले गए।
चुप्पी: गांव में इस घटना को लेकर चर्चा तो है, लेकिन कैमरे के सामने कोई भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
यह घटना प्रदेश में फल-फूल रहे झोलाछाप डॉक्टरों के नेटवर्क और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े करती है। एक व्यक्ति बिना डिग्री के 17 साल से इलाज कर रहा है और प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी।

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