रायपुर, 26 फरवरी: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बुधवार को शराब दुकानों और अहातों के स्थल चयन का मुद्दा गरमाया रहा। दिलचस्प बात यह रही कि विपक्षी दल के बजाय सत्तारूढ़ भाजपा के विधायकों ने ही अपनी सरकार के आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन को जमकर घेरा। विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में शराब दुकानें खोलने के लिए तय मापदंडों की अनदेखी की जा रही है।
प्रमुख मुद्दे और विधायकों की आपत्तियां
भाजपा विधायकों ने सदन में अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिए बिना रिहायशी और संवेदनशील इलाकों में दुकानें खोली जा रही हैं।
मंदिर के पास शराब दुकान: पूर्व सांसद और विधायक सुनील सोनी ने ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए मुद्दा उठाया कि रायपुर के व्यस्ततम इलाके कटोरा तालाब में मंदिर के ठीक बगल में शराब दुकान और अहाता खोल दिया गया है। उन्होंने भाठागांव की वालफोर्ट सिटी के पास मुख्य सड़क पर शराब दुकान होने से महिलाओं के साथ हो रही छेड़खानी की घटनाओं पर भी चिंता जताई।
अटल आवास में दुकान: वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि उनके क्षेत्र में अटल आवास (गरीब आवास योजना) के भीतर ही शराब दुकान खोल दी गई है। उन्होंने दावा किया कि यह देश का ऐसा अकेला मामला होगा जहाँ आवास परिसर के अंदर दुकान संचालित है।
हाइवे पर दुकानें: महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने नियमों को ताक पर रखकर नेशनल हाईवे पर शराब दुकानें खोलने का मामला सदन में रखा।
मंत्री का जवाब और आश्वासन
आबकारी मंत्री लखनलाल देवांगन ने बचाव करते हुए कहा कि वर्तमान में सभी दुकानें नियमों के तहत ही संचालित की जा रही हैं। हालांकि, विधायकों के कड़े रुख को देखते हुए उन्होंने निम्नलिखित आश्वासन दिए:
“मंदिर के बगल में दुकान खुलने की जानकारी फिलहाल संज्ञान में नहीं है। मामले का परीक्षण कराया जाएगा और यदि नियम विरुद्ध पाई गई, तो दुकान वहां से हटाई जाएगी। कहीं से भी शिकायत मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।”— लखनलाल देवांगन, आबकारी मंत्री
सभापति का हस्तक्षेप
मामले में बढ़ती बहस को देखते हुए सभापति धर्मजीत सिंह ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने नाराज विधायकों को सुझाव दिया कि वे अपनी शिकायतों को लिखित में मंत्री को सौंपें, ताकि उन विशिष्ट स्थानों का तकनीकी और वैधानिक परीक्षण कर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

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