कोरबा | न्यूज़ डेस्क आस्था के दो प्रमुख केंद्रों—माँ सर्वमंगला की नगरी कोरबा और माँ बम्लेश्वरी की नगरी डोंगरगढ़—को जोड़ने की मांग एक बार फिर ठंडे बस्ते में चली गई है। चैत्र नवरात्र शुरू होने को है, लेकिन रेलवे प्रबंधन ने जिलेवासियों को सीधी ट्रेन की सौगात नहीं दी है। इस अनदेखी से देवी भक्तों में भारी आक्रोश और निराशा देखी जा रही है।
रायपुर में घंटों इंतज़ार या आधी रात का सफर
वर्तमान में कोरबा से डोंगरगढ़ जाने के लिए यात्रियों के पास कोई सुलभ विकल्प नहीं है। सीधी ट्रेन सेवा न होने के कारण भक्तों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है:
- कनेक्टिंग ट्रेनों की मार: यात्रियों को पहले रायपुर जाना पड़ता है, जहाँ दूसरी ट्रेन के लिए घंटों इंतज़ार करना उनकी मजबूरी बन गई है।
- समय का अभाव: जो दो एक्सप्रेस ट्रेनें उपलब्ध हैं, उनमें से एक आधी रात को डोंगरगढ़ पहुँचाती है और दूसरी शाम को।
- बजट और समय पर बोझ: इस अव्यवस्था के कारण दर्शन के लिए दो से तीन दिन का समय लग जाता है, जिससे मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह यात्रा काफी खर्चीली और थकाऊ हो जाती है।
रेल संघर्ष समिति की मांग: “सुबह जाओ, रात को आओ”
रेल संघर्ष समिति लंबे समय से एक फास्ट पैसेंजर चलाने की मांग कर रही है। समिति का प्रस्ताव है कि:
- ट्रेन सुबह कोरबा से रवाना हो ताकि भक्त दोपहर तक माँ बम्लेश्वरी के दर्शन कर सकें।
- वही ट्रेन रात को डोंगरगढ़ से वापस कोरबा के लिए छूटे।
“दोनों शहरों के बीच अगाध आस्था का संबंध है, लेकिन रेलवे प्रबंधन इस जनभावना को समझने में विफल रहा है। हर नवरात्र हमें सिर्फ आश्वासन मिलता है, सुविधा नहीं।” – रेल संघर्ष समिति
भक्तों को था बड़ा भरोसा
स्थानीय लोगों का कहना है कि नवरात्र के दौरान विशेष ट्रेनों का संचालन तो किया जाता है, लेकिन कोरबा जैसे औद्योगिक शहर से सीधी कनेक्टिविटी न देना समझ से परे है। रेलवे के इस अड़ियल रवैये के कारण कई श्रद्धालु चाहकर भी डोंगरगढ़ जाने का प्लान नहीं बना पा रहे हैं।

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