कोरबा | शनिवार, 28 फरवरी 2026
कोरबा। जिले के सीएसईबी फुटबॉल ग्राउंड में शनिवार को आयोजित ‘कृषक उन्नति योजना’ के भव्य समारोह में उस वक्त एक अजीबोगरीब स्थिति निर्मित हो गई, जब जिला सहकारी बैंक के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। अपनी पीठ थपथपाने की होड़ में बैंक प्रबंधन ने एक ऐसे आदिवासी किसान को कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन के हाथों डेमो चेक दिलवा दिया, जिसने पिछले साल का लोन पहले ही चुकता कर दिया है और वर्तमान में उसे कोई नई राशि प्राप्त नहीं हुई है।
क्या है पूरा मामला?
आदिम जाति सेवा कृषक सहकारी समिति मर्यादित, भैसमा के अंतर्गत आने वाले किसान उजित राम राठिया (पिता सुकलाल राठिया) को वर्ष 2024 में 3 लाख 70 हजार रुपये का केसीसी (KCC) लोन स्वीकृत हुआ था। किसान ने इस राशि से पिछले वर्ष खेती की और धान बिक्री के बाद नियमानुसार बैंक का पूरा कर्ज चुकता भी कर दिया।
हैरानी की बात यह रही कि शनिवार को आयोजित किसान सम्मेलन में, जहाँ किसानों के खातों में धान अंतर की राशि भेजी जा रही थी, वहाँ बैंक अधिकारियों ने इसी किसान को बुलाकर फिर से उसी 3.70 लाख रुपये का डेमो चेक थमा दिया। कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन और महापौर राजकिशोर प्रसाद (एवं अन्य जनप्रतिनिधियों) की मौजूदगी में किसान को फोटो खिंचवाने के लिए खड़ा कर दिया गया, जबकि वास्तविकता में किसान को वर्तमान में कोई नई ऋण राशि प्राप्त नहीं हुई है।
सवालों के घेरे में बैंक अधिकारी
कार्यक्रम में मौजूद अन्य किसानों और जानकारों ने बैंक की इस कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। जब किसान ने 2024 का लोन लेकर उसे पटा दिया है, तो 2026 के कार्यक्रम में उसी पुरानी राशि का प्रदर्शन कर बैंक अधिकारी क्या साबित करना चाहते थे? क्या यह केवल मंत्री जी के सामने ‘टारगेट’ पूरा दिखाने और झूठी वाहवाही लूटने का एक तरीका था?
प्रबंधन की सफाई: “आगामी सत्र के लिए है लोन”
जब इस विसंगति के बारे में जिला सहकारी बैंक के प्रबंधक मोहम्मद जमाल खान से सवाल किया गया, तो उन्होंने बचाव करते हुए कहा:
“किसान को आगामी सत्र 2026-27 के लिए केसीसी लोन जारी किया जा रहा है। वर्तमान में भले ही यह तत्काल फायदा न दिखे, लेकिन जल्द ही राशि किसान के खाते में आ जाएगी जिससे वे खेती कर सकेंगे। हमने केसीसी स्टॉल लगाया है जहाँ ऋण की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।”
उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल
प्रबंधक के दावों के बावजूद चर्चा आम है कि यदि लोन आगामी सत्र के लिए है और अभी प्रक्रिया में है, तो बिना राशि हस्तांतरित हुए ‘डेमो चेक’ के जरिए प्रदर्शन क्यों किया गया? आदिवासी किसान को इस तरह भ्रम की स्थिति में रखकर शासन की छवि के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों पर क्या प्रशासन कोई कार्रवाई करेगा?
मुख्य बिंदु:
किसान: उजित राम राठिया (भैसमा)।
राशि: 3,70,000 रुपये (डेमो चेक)।

आरोप: पुराना लोन चुकता होने के बावजूद उसे वर्तमान उपलब्धि बताकर पेश किया गया।
कार्यक्रम: कृषक उन्नति योजना सह किसान सम्मेलन।

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