कोरबा। शहर के शासकीय पीजी कॉलेज परिसर स्थित गर्ल्स हॉस्टल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। विडंबना यह है कि हॉस्टल शुरू हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन प्रबंधन अब भी केवल बाउंड्रीवाल के भरोसे सुरक्षा का दावा कर रहा है। सुरक्षाकर्मियों की कमी के चलते परिसर में किसी भी अनजान व्यक्ति का प्रवेश बेहद आसान हो गया है, जिससे छात्राओं में असुरक्षा का माहौल है।
खुला प्रवेश द्वार दे रहा खतरों को दावत
गर्ल्स हॉस्टल मुख्य सड़क से सटा हुआ है। यहाँ सुरक्षा के लिए एक प्रवेश द्वार और उसके बगल में गार्ड पोस्ट बनाया गया है। नियमानुसार यहाँ 24 घंटे सुरक्षाकर्मी की तैनाती होनी चाहिए, जो आने-जाने वालों की सघन जांच करे और उनका रिकॉर्ड रजिस्टर में दर्ज करे। हकीकत इसके उलट है—गेट अक्सर खुला रहता है, जिससे कार और बाइक सवार बिना किसी रोक-टोक के अंदर तक पहुंच जाते हैं।
विभागों की आपसी खींचतान में अटकी सुरक्षा
परिसर की स्थिति वर्तमान में काफी संवेदनशील है क्योंकि यहाँ:
- गवर्नमेंट पीजी कॉलेज की छात्राएं रह रही हैं।
- गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज की प्रशिक्षु महिला चिकित्सक (इंटर्न्स) भी इसी परिसर में निवास करती हैं।
हैरानी की बात यह है कि दोनों ही विभाग सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के बजाय एक-दूसरे की ओर ताक रहे हैं। जिम्मेदारी के इस ‘पास-पास’ खेल में 80 से अधिक छात्राओं की सुरक्षा दांव पर लगी है।
नियमों की अनदेखी, अन्य संस्थानों से भी नहीं लिया सबक
शहर के अन्य गर्ल्स हॉस्टल और आवासीय विद्यालयों में सुरक्षा के कड़े मापदंड अपनाए जाते हैं, जहाँ महिला सैनिकों या गार्ड्स की तैनाती अनिवार्य होती है। पीजी कॉलेज हॉस्टल में बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ सुरक्षा की भी भारी उपेक्षा की जा रही है।
“गर्ल्स हॉस्टल जैसी संवेदनशील जगह पर बिना सुरक्षा गार्ड के गेट खुला रहना बड़ी अनहोनी को न्योता देना है। कॉलेज प्रबंधन को जल्द ही यहाँ महिला सुरक्षाकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करनी चाहिए।” — स्थानीय नागरिक
दोनों हॉस्टल वर्तमान में न केवल सुरक्षा बल्कि बुनियादी सुविधाओं से भी उपेक्षित नजर आ रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब जागता है।

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