[जिला कोरबा] | [25-02-2026]
जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपचार के दौरान 13 माह की मासूम बच्ची ‘वान्या’ की मौत के बाद अस्पताल परिसर में भारी तनाव और आक्रोश का माहौल है। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर पर इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
बरमपुर वार्ड निवासी प्रियंका केवट और उनके पति संजू केवट अपनी 13 महीने की बेटी वान्या को सर्दी-खांसी और निमोनिया की शिकायत के चलते 20 फरवरी 2026 को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। डॉक्टरों ने बच्ची की स्थिति देखते हुए उसे भाप (नेबुलाइजेशन) देने के लिए भर्ती करने की सलाह दी।
परिजनों के गंभीर आरोप
परिजनों का आरोप है कि आपातकालीन वार्ड में उपचार के दौरान स्थिति तब बिगड़ी जब बच्ची के हाथ में कैनुला लगाया गया।
अनुरोध की अनदेखी: मां प्रियंका का कहना है कि बच्ची कैनुला लगने के दौरान काफी रो रही थी। उन्होंने डॉक्टर से विनती की थी कि बच्ची को पहले शांत होने दें, उसके बाद ही इंजेक्शन लगाएं।
इंजेक्शन के तुरंत बाद अचेत: आरोप है कि डॉक्टर ने मां की बात अनसुनी कर इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगते ही वान्या की हालत बिगड़ गई और वह अचेत (कोमा) में चली गई।
चार दिन का संघर्ष: मासूम वान्या चार दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ती रही, लेकिन 24 फरवरी की रात उसने दम तोड़ दिया।
अस्पताल में तनाव, निष्पक्ष जांच की मांग
बच्ची की मौत की खबर मिलते ही परिजनों का धैर्य टूट गया और उन्होंने अस्पताल परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों की मांग है कि:
दोषी डॉक्टर और संबंधित नर्सिंग स्टाफ पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच हो।
अस्पताल प्रशासन अपनी जिम्मेदारी तय करे।
“अगर डॉक्टर हमारी बात सुन लेते और जल्दबाजी न दिखाते, तो आज हमारी बच्ची हमारे बीच होती। यह सीधा-सीधा लापरवाही का मामला है।” — परिजनों का बयान
प्रशासनिक चुप्पी
इस गंभीर मामले पर फिलहाल अस्पताल प्रबंधन या जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में मिलने वाले आपातकालीन उपचार और स्टाफ के व्यवहार पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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