KORBA NEWS | जून 19, 2026
मौसम की बेरुखी का सीधा असर अब आम आदमी की जेब और रसोई के बजट पर दिखने लगा है। कोरबा शहर और ग्रामीण इलाकों के साप्ताहिक बाजारों में इन दिनों सब्जियों की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसका मुख्य कारण स्थानीय स्तर पर कम उत्पादन और बाहरी राज्यों व जिलों से होने वाली आवक का ठप होना है। इस सीजन में यह पहली बार है जब टमाटर का दाम प्रति किलो 60 रुपए तक पहुंच गया है।
📉 क्यों लग रही है सब्जियों के दामों में आग?
कोरबा के बाजारों में मुख्य रूप से टमाटर की बड़ी खेप पत्थलगांव, मध्यप्रदेश, नागपुर और बेंगलुरू से आती है। लेकिन इस बार वहां किसानों की मेहनत पर बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने पानी फेर दिया है।
इस मौसम की मार के कारण टमाटर और अन्य हरी सब्जियों की फसलें खेतों में ही बर्बाद हो गईं। बाहरी राज्यों से आने वाली गाड़ियों की संख्या कम होने के कारण बाजार में मांग के मुकाबले सप्लाई बेहद कम है।
☀️ भीषण गर्मी और ओलावृष्टि की दोहरी मार
- स्टॉक करने में दिक्कत: तेज गर्मी के कारण सब्जी विक्रेता माल को अधिक दिनों तक स्टॉक करके नहीं रख पा रहे हैं। सब्जियां जल्दी खराब हो रही हैं, और इस नुकसान की भरपाई विक्रेता कीमतों को बढ़ाकर ग्राहकों से कर रहे हैं।
- लोकल उत्पादन ठप: बीते माह तक स्थानीय किसानों द्वारा सब्जी बाजार में भारी मात्रा में उपज पहुंचायी जा रही थी। लेकिन स्थानीय स्तर पर हुई ओलावृष्टि ने यहां के खेतों को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। यही वजह है कि अब बहुत कम लोकल किसान मंडियों में पहुंच रहे हैं।
🥒 करेला, ककड़ी और लौकी की आवक भी हुई सीमित
व्यापारियों के मुताबिक, सामान्य दिनों में इस समय तक कोरबा के थोक और चिल्हर बाजारों में सब्जियां प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहती थीं, जिससे दाम नियंत्रण में रहते थे। लेकिन इस बार टमाटर की भारी किल्लत है। इसके साथ ही गर्मी के सीजन में मिलने वाली मुख्य सब्जियां जैसे करेला, ककड़ी, खीरा, लौकी और तरोई की आवक भी काफी सीमित हो गई है।
राहत की बात: हरी सब्जियों की आसमान छूती कीमतों के बीच राहत की बात सिर्फ इतनी है कि आलू और प्याज की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं।

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