कोरबा | 24 जुलाई 2026
प्रदेश के 3700 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) ने बुधवार को अपने वेतनमान की मांग को लेकर राज्यभर में एक साथ मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के आह्वान पर सभी जिलों में कार्यरत सीएचओ ने एकजुट होकर शांतिपूर्ण रैली निकाली और कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की मांग है कि वेतनमान प्रकरण की मुख्य सचिव स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषी अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और भारत सरकार को तुरंत संशोधित प्रस्ताव भेजा जाए।
कोरबा में कलेक्ट्रेट पहुंचकर सौंपा ज्ञापन
कोरबा जिले में जिला उपाध्यक्ष प्रीति कुमारी कैवर्त्य की अगुवाई में सीएचओ कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा:
“यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं है। हम शासन के अनुमोदित निर्णयों के सम्मान, प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन और हजारों स्वास्थ्य अधिकारियों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठा रहे हैं। हमें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र न्याय करेंगे।”
संघ का गंभीर आरोप: अनुमोदित प्रस्ताव को बदलकर भेजा केंद्र
संघ का आरोप है कि राज्य स्वास्थ्य समिति की शासी निकाय द्वारा वेतनमान पुनर्निर्धारण के लिए विधिवत प्रस्ताव पास किया गया था। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश और भारत सरकार की गाइडलाइंस के बावजूद, अधिकारियों ने भारत सरकार को अलग (पुराना) प्रस्ताव भेज दिया।
इसी वजह से प्रदेश के हजारों सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी आज भी अपने हक के वेतनमान से वंचित हैं।
मुख्य मांगें:
- उच्चस्तरीय जांच: मुख्य सचिव स्तर या किसी स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच की जाए।
- कार्रवाई: जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
- संशोधित प्रस्ताव: अनुपूरक PIP के माध्यम से संशोधित प्रस्ताव तत्काल भारत सरकार को भेजा जाए।
- बकाया भुगतान: वेतनमान का पुनर्निर्धारण कर अंतर राशि (Arrears) सहित सभी लाभ प्रदान किए जाएं।
क्या है वेतनमान का पूरा विवाद?
- गाइडलाइन के नियम: आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर ऑपरेशनल गाइडलाइन के तहत सीएचओ को ₹25,000 प्रतिमाह निश्चित मानदेय और कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि (Performance Based Incentive) देने का प्रावधान है।
- शासी निकाय की मंजूरी: वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना (PIP) में राज्य स्वास्थ्य समिति की शासी निकाय ने वेतनमान पुनर्निर्धारण के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
- लापरवाही या साजिश?: इसके बावजूद केंद्र सरकार को पूर्ववत (पुराना) वेतनमान प्रस्ताव ही भेजा गया। संघ के अनुसार, रिकॉर्ड ऑफ प्रोसीडिंग्स (RoP) से स्पष्ट है कि केंद्र ने वही स्वीकृत किया जो राज्य से भेजा गया था। जांच में गड़बड़ी साबित होने पर यह सीधे तौर पर शासन के फैसलों की अवहेलना और प्रशासनिक लापरवाही का मामला बनता है।
प्रदर्शन में ये प्रमुख पदाधिकारी रहे शामिल
ज्ञापन सौंपने के दौरान ब्लॉक अध्यक्ष मयंक कुमार, महेंद्र कुमार, कुलदीप राजवाड़े, जिला कोषाध्यक्ष आरती कुमारी, CGPSK के जिला अध्यक्ष मदन चौहान, जिला महामंत्री जयसिंह, जिला सचिव गोवर्धन कंवर, वीरेंद्र कोसले, सुशील मिरी तथा विनय पटेल सहित बड़ी संख्या में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी मौजूद रहे।

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