रायपुर | छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर जारी अंदरूनी राजनीति और गुटबाजी एक बार फिर सरेआम हो गई है। वरिष्ठ नेताओं के दिल्ली दौरे से लौटते ही संगठन के भीतर खींचतान और तेज हो गई है। इसी गहमागहमी के बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ के पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष अरुण मालाकार को एक कारण बताओ नोटिस थमा दिया है।
मालाकार पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता उमेश पटेल के समर्थन में एक पोस्ट शेयर की, जिससे पार्टी की छवि धूमिल हुई और संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन हुआ। संगठन ने उन्हें तीन दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का अल्टीमेटम दिया है, ऐसा न करने पर एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
उमेश पटेल के समर्थन में की थी पोस्ट
दरअसल, प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर जारी खींचतान के बीच अरुण मालाकार ने अपने फेसबुक अकाउंट पर उमेश पटेल को कमान सौंपने की खुलकर पैरवी की थी। अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा:
“छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की वापसी का रास्ता मजबूत नेतृत्व से होकर गुजरता है। उमेश पटेल एक जमीनी नेता हैं जो जनता का दर्द समझते हैं और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने का माद्दा रखते हैं।”
उन्होंने पोस्ट के जरिए उमेश पटेल को तत्काल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की अपील की थी, जिसे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने लॉबिंग और अनुशासनहीनता माना है।
30 जुलाई को नोटिस जारी, 3 दिन का मिला समय
प्रभारी महामंत्री (संगठन एवं प्रशासन) मलकीत सिंह गैंदू के हस्ताक्षर से 30 जुलाई 2026 को जारी इस नोटिस में साफ कहा गया है कि सोशल मीडिया पर इस तरह का प्रचार संगठन की गरिमा के खिलाफ है। यदि तीन दिनों के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो पार्टी सख्त कदम उठाएगी।
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस नोटिस की कॉपी छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट, नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समेत कई दिग्गज नेताओं को भेजी गई है।
राजनीतिक मायने: क्या गुटबाजी पर लगाम लगा पाएगा हाईकमान?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अध्यक्ष पद को लेकर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में कई गुट सक्रिय हैं। सार्वजनिक मंचों या सोशल मीडिया के जरिए अपने पसंदीदा नेताओं के लिए माहौल बनाने की कोशिशों पर यह कार्रवाई एक बड़ा झटका है। हाईकमान ने इस नोटिस के जरिए साफ संदेश देने की कोशिश की है कि संगठनात्मक फैसलों पर सार्वजनिक दबाव या गुटबाजी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद से पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

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