कोरबा (छत्तीसगढ़)। भारतीय जनाधिकार पार्टी ने कोरबा जिले में स्थित ACB (India) Ltd. समूह की विभिन्न कोयला वाशरियों, ताप विद्युत परियोजनाओं, कोयला परिवहन एवं रेलवे साइडिंग गतिविधियों में वर्ष 1999 से लेकर वर्तमान तक हुए कामकाज की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। पार्टी ने इस पूरे मामले में सीबीआई (CBI), उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (SIT), वित्तीय व डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट तथा भौतिक सत्यापन कराने का आग्रह किया है।
इस विषय को लेकर 18 अगस्त 2026 को प्रातः 11:00 बजे SECL परिक्षेत्र, दीपका/गेवरा स्थित एसीबी कार्यालय के समक्ष विशाल एवं शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन व जन आंदोलन का आयोजन किया जा रहा है।
व्यापक जांच के मुख्य बिंदु एवं आरोप
प्रेस वार्ता के दौरान पार्टी पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह मामला सिर्फ एक वाशरी या स्थानीय प्रदूषण तक सीमित न होकर, अरबों रुपये के कोयला लेखांकन और डिजिटल व्यवस्था से जुड़ा है। संगठन द्वारा उठाए गए प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- क्षमता विस्तार व कोयला प्रसंस्करण: स्वीकृत क्षमता और वास्तविक उत्पादन का वर्षवार मिलान कराया जाए। ग्रामसभा, पेसा (PESA) कानून और पर्यावरण स्वीकृतियों के अनुपालन का सत्यापन हो।
- 1 करोड़ टन कोयला परिवहन का हिसाब: उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर पावर प्लांटों को भेजे गए 1 करोड़ टन से अधिक कच्चे और रिजेक्ट कोयले के एक-एक टन के स्रोत, वाशरी प्रक्रिया और अंतिम उपयोग की वैज्ञानिक जांच हो।
- रिजेक्ट कोयले के नाम पर हेरफेर: उच्च गुणवत्ता वाले कोयले को कागजों में ‘रिजेक्ट श्रेणी’ का दर्शाकर अन्यत्र विचलित (Divert) किए जाने की आशंका की जांच कराई जाए।
- डिजिटल फोरेंसिक ऑडिट: तौल कांटा सर्वर, जीपीएस (GPS), फास्टैग, आरएफआईडी (RFID), सीसीटीवी (CCTV) तथा रेलवे रेक प्रेषण अभिलेखों की डिजिटल फोरेंसिक जांच की मांग की गई है, ताकि फर्जी वाहनों व दोहरी प्रविष्टियों का सच सामने आ सके।
- नदी-नालों का प्रदूषण व भूजल दोहन: अहिरन एवं खोलार नदी सहित आसपास के प्राकृतिक जल स्रोतों में गाद/अपशिष्ट निस्तारण की स्वतंत्र मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जांच कराने पर जोर दिया गया है।
- 10 किमी दायरे में स्वास्थ्य सर्वेक्षण: वाशरियों और भारी परिवहन से प्रभावित 10 किलोमीटर के क्षेत्र में वायु, जल, ध्वनि प्रदूषण तथा जनस्वास्थ्य पर पड़े प्रभावों का स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वेक्षण हो।
- 2015 से डीजल-बायोडीजल व कर छूट की जांच: 1 जनवरी 2015 से अब तक औद्योगिक डीजल/बायोडीजल की खरीद-खपत तथा कंपनी द्वारा ली गई कर व विद्युत शुल्क छूट की समीक्षा की जाए।
- श्रमिक अधिकार व विभागीय जवाबदेही: कार्यरत श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी, ईएसआई, पीएफ, सुरक्षा मानकों और SECL, पर्यावरण, खनन व राजस्व विभाग के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो।
प्रमुख मांगें
- 1999 से वर्तमान तक की अवधि के लिए स्वतंत्र सीबीआई / एसआईटी जांच।
- डिपो व ट्रांसपोर्टेशन में प्रत्येक टन कोयले का भौतिक व फोरेंसिक मिलान।
- जल स्रोतों के प्रदूषण एवं 10 किमी क्षेत्र में जनस्वास्थ्य सर्वेक्षण।
- 2015 से बायोडीजल उपयोग एवं प्राप्त सरकारी कर छूटों का ऑडिट।
- दोष सिद्ध होने पर प्राथमिकी (FIR), वित्तीय वसूली व अभियोजन कार्रवाई।
“कोयला राष्ट्रीय संपदा है, हर टन का हिसाब होना चाहिए”
पत्रकारों को संबोधित करते हुए पार्टी संयोजकों ने कहा कि “कोयला राष्ट्रीय संपदा है और पानी-जमीन आने वाली पीढ़ियों की विरासत है। जनस्वास्थ्य की कीमत पर कोई भी औद्योगिक गड़बड़ी स्वीकार नहीं की जाएगी।”
इस प्रेस वार्ता में संयोजक अध्यक्ष दीपक दुबे, उपाध्यक्ष विंदेश सिंह, महामंत्री संगठन संजय सिंह, महामंत्री प्रशासनिक शैलेन्द्र कुमार गोपाल, सचिव घनश्याम चंद्रा व अशोक जायसवाल, युवा मोर्चा संयोजक अध्यक्ष संजय रत्नाकर (पप्पू सरदार) तथा कोरबा जिला संयोजक दिनेश यादव सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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