कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र में एक निजी ठेका कंपनी के अधिकारी की दादागीरी से आक्रोशित ग्रामीणों ने चक्काजाम कर दिया। टीएमसी (TMC) नामक ठेका कंपनी के एक अफसर ने सड़क की खुदाई का विरोध करने पर एक ग्रामीण को जमीन में जिंदा गाड़ देने की धमकी दे डाली। इस घटना के बाद स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अरदा चौक पर चक्काजाम कर आवागमन पूरी तरह ठप कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, सिंघाली भूमिगत खदान में टीएमसी नामक ठेका कंपनी कार्यरत है। कंपनी के अधिकारी केके सिंह द्वारा भेजीनारा से लालपुर जाने वाले मुख्य मार्ग को अवरुद्ध किया जा रहा था। जब गांव के ही शंकर सिंह ने सार्वजनिक रास्ते को बंद करने से मना किया, तो यह बात अफसर को रास नहीं आई।
आरोप है कि अधिकारी केके सिंह ने न सिर्फ शंकर सिंह को जातिगत गाली दी, बल्कि उसे जान से मारने और जमीन में जिंदा गाड़ देने की धमकी भी दे डाली।
कार्रवाई न होने पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
इस घटना से आहत शंकर सिंह और समाज के लोगों ने बांकीमोंगरा थाना समेत पुलिस अधीक्षक (SP) कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई थी। इसके बावजूद जब आरोपी अधिकारी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया।
गुरुवार की सुबह आदिवासी समाज के लोग भारी संख्या में अरदा चौक पर एकत्रित हुए और मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
प्रशासन के हाथ-पांव फूले, FIR के बाद शांत हुआ आंदोलन
सड़क जाम और बढ़ते आक्रोश की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण आरोपी अधिकारी की गिरफ्तारी और तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे।
आखिरकार, प्रशासन को ग्रामीणों के आक्रोश के आगे झुकना पड़ा। पुलिस ने टीएमसी कंपनी के अधिकारी केके सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(3) और एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1)(द) के तहत अपराध दर्ज किया। एफआईआर की कॉपी मिलने के बाद ही ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त किया, जिसके बाद यातायात बहाल हो सका।

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