कोरबा | [26-04-26] : महिला आरक्षण बिल को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। जिला कांग्रेस प्रभारी एवं पूर्व विधायक डॉ. रश्मि सिंह ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक इस मुद्दे पर झूठ बोल रहे हैं। कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण को केवल एक ‘मुखौटा’ की तरह इस्तेमाल कर रही है, जबकि उसकी असली मंशा अपने मनमुताबिक सीटों का परिसीमन करने की थी।
“नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पर सरकार की नीयत साफ नहीं
डॉ. रश्मि सिंह ने स्पष्ट किया कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023’ (128वां संविधान संशोधन) संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है और राष्ट्रपति की मुहर के बाद कानून बन चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह कानून बन चुका है, तो सरकार इसे तुरंत प्रभावी क्यों नहीं कर रही?
“भाजपा 2023 के आरक्षण बिल को लागू करने के बजाय परिसीमन का इंतजार क्यों कर रही है? यदि सरकार की मंशा साफ होती, तो वर्तमान सदस्य संख्या में ही 33 प्रतिशत आरक्षण तुरंत लागू किया जा सकता था। कांग्रेस और सभी विपक्षी दल इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं।”
131वां संशोधन विधेयक और भाजपा का ‘षड्यंत्र’
पूर्व विधायक ने 16 अप्रैल 2026 को संसद में पेश किए गए 131वें संविधान संशोधन विधेयक का जिक्र करते हुए कहा कि यह महिला आरक्षण के नाम पर ‘परिसीमन संशोधन बिल’ को पास कराने की कोशिश थी।
- सीटों का गणित: इस विधेयक में लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था (राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें)।
- आधार वर्ष पर विवाद: परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई थी। डॉ. सिंह ने सवाल किया कि जब 2026-27 की जनगणना की प्रक्रिया शुरू है और जाति जनगणना की बात हो रही है, तो पुराने आंकड़ों पर परिसीमन की जिद क्यों?
- विपक्ष की एकजुटता: उन्होंने दावा किया कि भाजपा का यह ‘षड्यंत्र’ विपक्षी दलों की एकजुटता के कारण विफल हो गया, और अब अपनी नाकामी छिपाने के लिए भाजपा भ्रम फैला रही है कि विपक्ष ने बिल का समर्थन नहीं किया।
कांग्रेस ने हमेशा दी महिलाओं को भागीदारी
इतिहास का हवाला देते हुए डॉ. रश्मि सिंह ने कहा कि भारत में महिला आरक्षण की नींव कांग्रेस ने ही रखी थी:
- राजीव गांधी (1989): पंचायतों और नगर पालिकाओं में एक तिहाई आरक्षण के लिए पहला विधेयक लाए।
- पी.वी. नरसिम्हा राव (1993): 73वें और 74वें संशोधन के जरिए स्थानीय निकायों में आरक्षण को हकीकत बनाया।
- डॉ. मनमोहन सिंह (2010): राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल पारित कराया।
आज देश भर में 15 लाख से अधिक निर्वाचित महिला प्रतिनिधि कांग्रेस की इन्हीं दूरगामी नीतियों का परिणाम हैं।
प्रमुख उपस्थिति
इस पत्रकारवार्ता में विधायक फूलसिंह राठिया, मुकेश राठौर, मनोज चौहान, पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद, श्याम सुंदर सोनी, कुसुम द्विवेदी, सपना चौहान और सुरेंद्र प्रताप जायसवाल सहित भारी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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