कोरबा | छत्तीसगढ़ के जिला और जनपद पंचायत कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन का लाभ नहीं मिलने से कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ जिला-जनपद पंचायत कर्मचारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री विजय शर्मा को ज्ञापन सौंपा है।
इसी कड़ी में संघ के पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक कोरबा शहर के टीपी नगर स्थित एक निजी होटल में आयोजित की गई, जिसमें कर्मचारियों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं पर गहन चर्चा की गई।
नियमों में प्रावधान, फिर भी अधिकार से वंचित
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा बनाए गए ‘छत्तीसगढ़ पंचायत नियम’ के प्रावधानों के अनुसार, जिला व जनपद पंचायतों में कर्मचारियों की नियुक्ति गठित समिति के माध्यम से की जाती है।
पेंशन से वंचना का मुख्य कारण:
पंचायती राज अधिनियम में कर्मचारियों को वेतन, भत्ते, पेंशन और सेवानिवृत्ति के लाभ दिए जाने का स्पष्ट उल्लेख है। इसके बावजूद, शासन स्तर से कोई स्पष्ट आदेश जारी न होने के कारण कर्मचारी सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन से वंचित हैं, जिससे उन्हें जीवनयापन में भारी आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।
650 कर्मचारियों के भविष्य पर संकट
वर्तमान में प्रदेश के 27 जिलों और 146 जनपद पंचायतों में लगभग 650 कर्मचारी ही कार्यरत हैं।
- पुराना रिकॉर्ड: वर्ष 1981 से 1989 के मध्य जनपद सभा व पंचायतों में पदस्थ कर्मचारियों (जैसे आयुर्वेदिक डॉक्टर, कम्पाउंडर, वाटरमैन, टाइमकीपर और शिक्षक) का शासकीय विभागों में संविलियन किया जा चुका है।
- सौतेला व्यवहार: आज तक कार्यरत लिपिकों (Clerks) और भृत्यों (Peons) का शासकीय विभागों में न तो संविलियन किया गया है और न ही उन्हें पेंशन का लाभ दिया जा रहा है।
23 से अधिक विभागों की जिम्मेदारी, पर वेतन भत्तों में भेदभाव
पंचायती राज व्यवस्था के तहत जिला व जनपद पंचायतों को 23 से अधिक शासकीय विभागों के कार्यों एवं योजनाओं के सुचारू संचालन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
मूल जिला व जनपद पंचायत के कर्मचारी शासकीय कर्मचारियों की भांति ही शासन की सभी योजनाओं को सफलता पूर्वक लागू कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें शासकीय कर्मचारियों के समान वेतन, भत्ते और पेंशन का लाभ नहीं मिलता। वर्तमान में कर्मियों के वेतन-भत्ते का भुगतान वर्ष में एक बार प्राप्त होने वाले सामान्य प्रयोजन/मुद्रांक शुल्क की राशि से किया जाता है।
संघ की प्रमुख मांगें
मध्य प्रदेश शासन की तर्ज पर संघ ने शासन से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- कोषालय (Treasury) से भुगतान: लिपिकों और भृत्यों को मध्य प्रदेश की भांति कोषालय के माध्यम से सीधे वेतन व भत्तों का भुगतान किया जाए।
- पेंशन नियम का निर्माण: सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए अधिनियम की धारा 131 में निहित प्रावधानों के अनुरूप जल्द से जल्द पेंशन नियम बनाए जाएं।

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