घटना की चर्चा शहर से कोयलांचल तक, आखिर क्यों दिया गया इस सनसनीखेज वारदात को अंजाम?
कोयला, कबाड़ और डीजल माफियाओं से तो नहीं जुड़े हैं तार? चर्चाएं तेज, क्या बेनकाब होंगे असली चेहरे?
कोरबा। शनिवार-रविवार की दरमियानी रात कोरबा में हुई सनसनीखेज वारदात को 55 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस के हाथ अब भी खाली हैं। एक एएसआई (ASI) के पुत्र को गाड़ी से कुचलकर हत्या का प्रयास करने, हवाई फायरिंग, डकैती और बीच-बचाव व आरोपियों का पीछा करने वाले एक युवा पत्रकार का अपहरण कर उस पर जानलेवा हमला करने वाले आरोपी अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।
इस हमले में गंभीर रूप से घायल युवक अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। इलाज के भारी-भरकम खर्च को उठाने के लिए बेबस पिता लोगों से आर्थिक मदद की गुहार लगा रहे हैं, जबकि उसे इस हाल में पहुंचाने वाले अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं।
वेन्यू कार बरामद, बोलेरो और मुख्य आरोपी अभी भी लापता
इस बीच मिली ताजा जानकारी के अनुसार, पुलिस ने उस ‘वेन्यू कार’ को लावारिस हालत में बरामद कर लिया है, जिसका उपयोग युवा पत्रकार का अपहरण करने और उसके साथ बेरहमी से मारपीट करने के लिए किया गया था। हालांकि, पुलिस कर्मी रामनारायण रात्रे के बेटे चंद्रमणि को कुचलने में इस्तेमाल की गई ‘बोलेरो’ गाड़ी और उसमें सवार आरोपियों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है।
पुष्ट सूत्रों के अनुसार, मानिकपुर पुलिस चौकी प्रभारी परमेश्वर राठौर और बांकीमोगरा थाना स्टाफ आपसी समन्वय बनाकर आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार छापेमारी कर रहे हैं। पुलिस को कुछ संदेहियों का सुराग मिला है, जिन्हें बांकीमोगरा थाने में तलब कर पूछताछ की जा रही है।
“गाड़ी में पेट्रोल नहीं है तो गस्त कैसे करें!” – बांकीमोगरा पुलिस की सुस्ती पर उठे सवाल
इस पूरी घटना के दौरान बांकीमोगरा पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक स्थानीय युवा नेता के अनुसार, घटना की रात जब उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिस स्टाफ को गश्त तेज करने का सुझाव दिया, तो स्टाफ का गैर-जिम्मेदाराना जवाब था— “पेट्रोलिंग गाड़ी में पेट्रोल नहीं है, तो भला गस्त कैसे करें!” गौर करने वाली बात यह भी है कि पिछले दिनों ही डीजल चोरों से सांठगांठ उजागर होने पर पुलिस अधीक्षक (SP) ने इसी थाने के एक आरक्षक को सस्पेंड किया था। ऐसे में इस गंभीर मामले की जांच की दिशा और दशा दोनों पर सवाल उठना लाजिमी है।
क्या कोयला, कबाड़ और डीजल माफियाओं की है सोची-समझी साजिश?
इस वारदात को लेकर कोरबा शहर से लेकर कोयलांचल तक यह चर्चा बेहद तेज है कि इसके पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ हो सकता है। घायल युवक के पिता रामनारायण रात्रे जिला पुलिस बल में पूरी निष्ठा से अपनी ड्यूटी करते आ रहे हैं। वहीं, उनके साथी और युवा पत्रकार अरविंद राठौर लगातार क्षेत्र की गतिविधियों पर समाचार प्रकाशित करते हैं।
आशंका जताई जा रही है कि हमलावरों का संबंध डीजल, कबाड़ और कोयले के अवैध कारोबार से जुड़े माफियाओं से हो सकता है। जिस तरह से अपराधियों ने कोरबा शहर से पीछा कराते हुए पत्रकार को बलगी तक खींच लाया और बीच रास्ते में फोन करके महज कुछ मिनटों में 25 से 30 लोगों की भीड़ इकट्ठा कर ली, वह किसी सोची-समझी साजिश की ओर इशारा करता है।
कई अनुत्तरित सवाल, पुलिस के खुलासे पर टिकी निगाहें
फिलहाल, क्षेत्र का हर नागरिक इस हकीकत को जानने के लिए उत्सुक है कि:
- आखिर एक पुलिसकर्मी के बेटे को कुचलकर हत्या करने का प्रयास क्यों किया गया?
- हमलावर जानबूझकर पत्रकार को पीछा कराते हुए बलगी तक क्यों ले गए?
- अपराधियों के पास प्रतिबंधित पिस्टल कहाँ से आई और उसका असली मालिक कौन है?
पीड़ितों ने आरोपियों का हुलिया और गाड़ियों के नंबर पुलिस को दे दिए हैं। पुलिस के आला अधिकारी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी गोपनीयता बरत रहे हैं। अब देखना यह होगा कि पुलिस इस मामले का क्या और कब तक खुलासा करती है, इस पर पूरे शहर की निगाहें टिकी हुई हैं।

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