कोरबा | जून महीने का दूसरा पखवाड़ा बीतने को है, लेकिन कोरबा वासियों को तपती गर्मी और चिपचिपी उमस से राहत मिलती नहीं दिख रही है। पिछले सप्ताह हुई प्री-मानसून की हल्की गतिविधियों के बाद से आसमान पर काले बादल तो रोज डेरा डाल रहे हैं, लेकिन वो बिना बरसे ही लौट जाते हैं। नतीजा यह है कि हवा में नमी बढ़ने से उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
🌡️ पारा 44 डिग्री के पार, कूलर-पंखा भी फेल
क्षेत्र में मौसम का मिजाज लगातार उतार-चढ़ाव भरा बना हुआ है। दोपहर के समय तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, वहीं शाम होते ही उमस के कारण तापमान 32 से 37 डिग्री जैसा महसूस हो रहा है। इस चिपचिपी गर्मी के आगे अब घर के कूलर और पंखे भी बेअसर साबित हो रहे हैं, जिससे लोगों का दिन बेचैनी में गुजर रहा है।
⚡ बिजली कटौती ने बढ़ाई मुसीबत, पेयजल संकट गहराया
उमस भरी गर्मी से बचने के लिए घरों और दफ्तरों में दिन-रात एसी और कूलर चल रहे हैं, जिससे बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। ओवरलोडिंग के कारण बार-बार अघोषित बिजली कटौती हो रही है।
- बुजुर्ग और बच्चे परेशान: बार-बार लाइट गोल होने से सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है।
- पानी की किल्लत: बिजली गुल रहने की वजह से शहर के कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति (Water Supply) भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
बुधवार शाम का हाल: बीते बुधवार की शाम आसमान पर घने काले बादल छाए। ऐसा लगा कि अब राहत की बौछारें पड़ेंगी, लेकिन बादल महज फुहारें बरसाकर आगे निकल गए। इस अधूरी बारिश ने राहत देने के बजाय वातावरण में उमस को और ज्यादा बढ़ा दिया।
🚜 किसानों की बढ़ी चिंता, थमी खेतों की रफ्तार
इस बेरुखे मौसम की सबसे बड़ी मार क्षेत्र के अन्नदाताओं पर पड़ रही है। आमतौर पर इस समय तक किसान खेतों की तैयारी में जुट जाते हैं, लेकिन इस बार स्थिति अलग है:
- बोआई में देरी: मानसून पूर्व (Pre- मानसून) की अच्छी बारिश न होने से खेत सूखे पड़े हैं।
- जोताई रुकी: पानी के अभाव में खेतों की जोताई और धान की बोआई का काम शुरू नहीं हो पा रहा है।
- बढ़ती चिंता: आसमान की ओर टकटकी लगाए किसान अब बस जल्द से जल्द मानसून के आने की दुआ कर रहे हैं।

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