कोरबा।
प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत छतों पर सोलर प्लांट लगवाने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। अब उत्पन्न और उपयोग की गई बिजली का हिसाब-किताब ‘नेट मीटरिंग’ (Net Metering) प्रणाली के आधार पर किया जाएगा। उपभोक्ता द्वारा ग्रिड में भेजी गई अतिरिक्त सौर ऊर्जा को उनके आगामी बिजली बिलों में क्रेडिट (Credit) के रूप में समायोजित किया जाएगा।
📊 क्या है नई व्यवस्था और बायबैक प्रोसेस?
मासिक खपत में समायोजन: नेट मीटरिंग प्रणाली के तहत सबसे पहले उत्पादित सौर ऊर्जा का समायोजन उपभोक्ता की मासिक खपत में किया जाएगा।
ग्रिड में क्रेडिट: यदि उत्पादित बिजली खपत से अधिक होती है, तो अतिरिक्त यूनिट ग्रिड में चली जाएगी और हर महीने उपभोक्ता के खाते में जुड़ती रहेगी।
बायबैक सुविधा: वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर बची हुई अतिरिक्त यूनिट्स का नियमानुसार बायबैक (Buyback) किया जाएगा। इसकी निर्धारित राशि उपभोक्ता के खाते में जमा कर आगे के बिलों में एडजस्ट की जाएगी।
नियामक आयोग को भेजा गया प्रस्ताव
राज्य बिजली वितरण कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ‘सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया’ (SECI) द्वारा निर्धारित खरीद दर को अपनाने का प्रस्ताव ‘विद्युत नियामक आयोग’ को मंजूरी के लिए भेजा है।
⚠️ 36 आवेदन लौटाए गए: स्वीकृत क्षमता से अधिक के थे प्लांट
जांच प्रक्रिया के दौरान कोरबा सर्किल में 36 आवेदन वापस कर दिए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन उपभोक्ताओं ने अपने स्वीकृत अनुबंध भार (Contract Demand) से अधिक क्षमता के सोलर प्लांट के लिए आवेदन किया था।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह: प्रभावित उपभोक्ता अपने अनुबंध भार में आवश्यक सुधार (Sanctioned Load Increase) करवाकर पुनः आवेदन जमा कर सकते हैं।
📈 कोरबा में सूर्यघर योजना की प्रगति (एक नजर में)
कार्य का विवरण। संख्या / स्थिति
स्वीकृत आवेदन (जांच के बाद) 4,532
स्थापित सोलर प्लांट 1,738 घर
आगामी दिनों में लगने वाले प्लांट. 2,794 घर
सब्सिडी स्वीकृति प्राप्त उपभोक्ता. 1,315
सब्सिडी राशि का भुगतान पूर्ण. 1,264 उपभोक्ता
कैसे काम करती है प्रक्रिया?
पंजीयन के बाद उपभोक्ता स्वीकृत वेंडरों के मार्गदर्शन में प्लांट स्थापना का काम पूरा करते हैं। इसके बाद नेट मीटर लगाने का कार्य राज्य बिजली वितरण कंपनी द्वारा किया जाता है, जिससे सौर ऊर्जा का सटीक हिसाब-किताब रखा जा सके।

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