कोरबा | डिजिटल डेस्क: एसईसीएल (SECL) सुराकछार रेलवे साइडिंग से उड़ने वाले कोयले के गुबार और प्रदूषण से तंग आकर आखिरकार ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। पांच गांवों के ग्रामीणों ने पार्षद के नेतृत्व में मुख्यमार्ग पर चक्काजाम कर दिया। करीब चार घंटे तक चले इस आंदोलन के बाद प्रशासन और प्रबंधन द्वारा लिखित आश्वासन मिलने पर चक्काजाम समाप्त हुआ।
😷 बीमारी की चपेट में आ रहे लोग, 3 जून को ही दी थी चेतावनी
नगर पालिक निगम के वार्ड क्रमांक 65 के पार्षद प्रेम कुमार साहू ने क्षेत्र की जनता को हो रही गंभीर परेशानियों को लेकर 3 जून को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो 15 जून को पंखादफाई मुख्यमार्ग पर चक्काजाम किया जाएगा। प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण सोमवार सुबह ठीक 9 बजे भैरोताल, प्रेमनगर सहित पांच गांवों के लोग सड़क पर उतर आए।
आंदोलनकारियों का कहना है कि कोल डस्ट (कोयले की धूल) के कारण पूरा वातावरण प्रदूषित हो चुका है। क्षेत्र के लोग दमा, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और आंखों की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
📋 ग्रामीणों की प्रमुख मांगें जिन पर अड़े रहे आंदोलनकारी:
- धूल पर प्रभावी नियंत्रण: रेलवे साइडिंग से उड़ने वाली कोयले की धूल पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- नियमित जल छिड़काव: मुख्यमार्ग और प्रभावित इलाकों में रोजाना पानी का छिड़काव हो।
- स्टाप डैम का निर्माण: हर साल खोलार नदी में बनने वाले अस्थायी स्टाफ डैम को इस बार नहीं बनाया गया, जिससे जल संकट गहरा गया है, इसे तुरंत बनाया जाए।
- हाईट कंट्रोलर की मरम्मत: रेलवे द्वारा लगाए गए हाइट कंट्रोलर को दुरुस्त किया जाए।
अफसरों को देना पड़ा लिखित आश्वासन, 17 जून तक का समय
चक्काजाम की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे। शुरुआत में ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे। स्थिति को बिगड़ता देख पुलिस-प्रशासन ने रेलवे और SECL के अधिकारियों को मौके पर बुलाया।
सभी पक्षों के बीच हुई लंबी चर्चा के बाद, अधिकारियों ने 17 जून तक समस्या का समाधान करने का लिखित आश्वासन दिया। इस लिखित वादे के बाद, दोपहर करीब 1 बजे (चार घंटे बाद) ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त किया और मार्ग पर वाहनों की आवाजाही दोबारा शुरू हो सकी।

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