कोरबा / करतला: 108 संजीवनी एक्सप्रेस के ईएमटी और पायलट की त्वरित सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया। एम्बुलेंस में डिलीवरी के दौरान नवजात बच्चे के गले में गर्भनाल फंसी हुई थी, जिसे ईएमटी ने सुरक्षित बाहर निकाला। फिलहाल जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम करतला निवासी 27 वर्षीय रमशीला राठिया (पति चंदन राम राठिया) को दोपहर लगभग 12 बजे तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों और गांव की मितानिन के सहयोग से महिला को तत्काल नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र करतला लाया गया। प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे के गले में नाल फंसी हुई है और स्थिति गंभीर देखते हुए उन्हें तत्काल जिला अस्पताल कोरबा के लिए रेफर कर दिया गया।
रास्ते में बढ़ा दर्द, एम्बुलेंस रोककर कराया सुरक्षित प्रसव
रेफर केस की सूचना मिलते ही सरगबुंदिया 108 एम्बुलेंस के ईएमटी कृष्णा श्रीवास और पायलट दिनेश यादव बिना समय गंवाए मरीज को लेकर जिला अस्पताल कोरबा के लिए रवाना हुए। रास्ते में गोड़ी गांव के समीप महिला का प्रसव पीड़ित दर्द बेहद तेज हो गया और स्थिति नाजुक होने लगी।
जोखिम को समझते हुए ईएमटी कृष्णा श्रीवास ने पायलट को गाड़ी रोकने को कहा और एम्बुलेंस में ही उपलब्ध मेडिकल किट के उपयोग से सुरक्षित डिलीवरी कराई। प्रसव के दौरान नवजात के गले में नाल फंसी हुई थी, जिसे ईएमटी ने अपनी सूझबूझ और मेडिकल कुशलता से सुरक्षित तरीके से अलग किया।
जिला अस्पताल में कराया गया भर्ती
सुरक्षित प्रसव के बाद 108 टीम ने तत्काल जच्चा-बच्चा को जिला अस्पताल कोरबा पहुंचाकर भर्ती कराया। डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद बताया कि मां और बच्चा दोनों पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित हैं। 108 टीम की इस त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ की परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने जमकर सराहना की है।

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