जांजगीर-चांपा। सरखो निवासी विजेंद्र साहू (सोनू) ने अपने 40वें जन्मदिन पर मरणोपरांत अंगदान का संकल्प लेकर मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। उन्होंने अपने अंगों को जरूरतमंद मरीजों के जीवन में उपयोगी बनाने के उद्देश्य से जांजगीर मेडिकल कॉलेज को अंगदान के लिए संकल्पित किया है।
विजेंद्र साहू का कहना है कि उनके जाने के बाद भी उनके अंग किसी जरूरतमंद के काम आ सकें, तो इससे बड़ी सार्थकता और क्या होगी। उनके संकल्प के अनुसार हृदय, पैंक्रियाज, लिवर, किडनी, फेफड़े और आंत जैसे अंग जरूरतमंद मरीजों के उपचार में उपयोगी हो सकते हैं। वहीं, यदि आंखें दान के योग्य रहीं तो किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दृष्टि का सहारा मिल सकता है।
उन्होंने यह संदेश भी दिया कि यदि कोई अंग प्रत्यारोपण के लिए उपयोगी नहीं रहा, तो भविष्य के डॉक्टरों की शिक्षा और चिकित्सा अनुसंधान में उसका उपयोग किया जा सकता है।
विजेंद्र साहू का यह कदम समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को मृत्यु के बाद भी किसी के जीवन में उम्मीद बनने के लिए प्रेरित करने वाला है।
- आइए, अंगदान के लिए संकल्प लें और किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने की इस मुहिम का हिस्सा बनें।

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