कोरबा | जिले के धान उपार्जन केंद्रों से फसल उठाव की निर्धारित समय सीमा (28 फरवरी) समाप्त हो चुकी है, लेकिन लक्ष्य अब भी कोसों दूर है। वर्तमान में जिले के विभिन्न केंद्रों में 3 लाख 92 हजार क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। इस स्थिति ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद कलेक्टर ने मिलर्स की आपात बैठक बुलाकर सख्त लहजा अख्तियार किया है।
⚠️ लापरवाही पर बरसे कलेक्टर, दी कार्रवाई की चेतावनी
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने समीक्षा बैठक में स्पष्ट किया कि शासन द्वारा पर्याप्त समय और संसाधन दिए जाने के बाद भी कार्य पूर्ण न होना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने मिलर्स को दो टूक शब्दों में कहा:
अब किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हर मिलर के लिए दैनिक लक्ष्य (Daily Target) तय कर दिया गया है।
उठाव में जानबूझकर देरी करने वाले मिलर्स के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
⛈️ मौसमी जोखिम और भंडारण का संकट
उपार्जन केंद्रों में भारी मात्रा में धान जाम होने से भंडारण की समस्या खड़ी हो गई है। आगामी दिनों में मौसम परिवर्तन और बेमौसम बारिश की आशंका को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे केंद्रों की ‘रियल-टाइम मॉनिटरिंग’ करें और जहां भी परिवहन या मजदूरों की समस्या आ रही है, उसे तत्काल सुलझाएं।
मिलर्स ने गिनाईं चुनौतियां
बैठक के दौरान मिलर्स ने अपनी कुछ व्यावहारिक दिक्कतें भी साझा कीं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- परिवहन (ट्रकों) की कमी।
- मजदूरों की अनुपलब्धता।
- कुछ तकनीकी बाधाएं।
हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि समस्याओं का समाधान त्वरित रूप से किया जाएगा, लेकिन इसे कार्य में ढिलाई का बहाना नहीं बनाया जा सकता। अब प्रशासन दैनिक आधार पर प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करेगा।
प्रमुख बिंदु एक नजर में:
विवरण आंकड़े/जानकारी
लंबित धान की मात्रा 3.92 लाख क्विंटल
अंतिम तिथि 28 फरवरी (बीत चुकी है)
कलेक्टर का निर्देश दैनिक लक्ष्य निर्धारित, सख्त मॉनिटरिंग
मुख्य चिंता खराब मौसम और भंडारण क्षमता

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