बहेराडीह (जांजगीर-चाम्पा) | “कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता, बस उसे करने का जज्बा बड़ा होना चाहिए।” इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है जांजगीर-चाम्पा जिले के बलौदा ब्लॉक की पुष्पा यादव ने। पुष्पा ने कचरे और गोबर से सोना (जैविक खाद) बनाने के हुनर को अपनाकर न केवल अपनी किस्मत बदली, बल्कि आज वे जिले की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।
बाड़ी से शुरू हुआ सफर, अब 6 जिलों में कारोबार
पुष्पा यादव ने अपने घर के पीछे छोटी सी बाड़ी में गोबर गैस संयंत्र के पास केंचुआ पालन (Vermicompost) का काम शुरू किया था। जब प्रदेश में गोठान योजना लागू हुई, तो उनके अनुभव और खाद की गुणवत्ता को देखते हुए उन्हें कोरबा और बिलासपुर समेत 6 जिलों के गोठानों में केंचुआ सप्लाई और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी मिली।
आंकड़ों में सफलता की कहानी
पुष्पा की मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले छह वर्षों में उन्होंने केंचुआ और खाद बेचकर 13 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की है। उनकी सफलता के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- किस्म: उन्होंने आईसीनिया फोटीडा (Eisenia Fetida) किस्म के केंचुओं का पालन किया।
- सप्लाई: 6 जिलों के गोठानों और स्थानीय किसानों को केंचुआ व खाद की आपूर्ति।
- प्रशिक्षण: सैकड़ों महिलाओं को केंचुआ पालन के गुर सिखाए।
समूह से ‘पशु सखी’ तक का सफर
पुष्पा की यात्रा साल 2005 में ‘गंगे मईय्या स्व सहायता समूह’ के गठन के साथ शुरू हुई थी। शुरुआत में उन्होंने मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) बनाने का काम किया। 2020 में बिहान (NRLM) से जुड़ने के बाद उनके पंखों को नई उड़ान मिली।
“जिला प्रशासन ने पुष्पा यादव को न केवल ‘लखपति दीदी’ के रूप में चयनित किया है, बल्कि उनके कृषि और पशुपालन के अनुभव को देखते हुए उन्हें ‘पशु सखी’ की भी जिम्मेदारी सौंपी है।”
उन्होंने जांजगीर के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) से सब्जी खेती और नर्सरी प्रबंधन का भी विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिससे वे अब गांव की अन्य महिलाओं को सशक्त बना रही हैं।
निष्कर्ष
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर पुष्पा यादव जैसी महिलाएं यह साबित करती हैं कि यदि अवसर और सही मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण महिलाएं भी उद्यमिता के क्षेत्र में बड़े मुकाम हासिल कर सकती हैं।

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