कोरबा | जिले के कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पानी की बचत और बेहतर मुनाफे के उद्देश्य से कोरबा के किसान अब पारंपरिक धान की खेती के बजाय सब्जी, गेहूं और दलहन-तिलहन की फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। विशेष रूप से सब्जी के रकबे में 5 हजार हेक्टेयर की बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
प्रमुख आंकड़े: एक नजर में
जिले में रबी सीजन के लिए निर्धारित लक्ष्यों और वर्तमान स्थिति का विवरण नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं:
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फसल का प्रकार |
पिछला रकबा (हेक्टेयर) |
वर्तमान/लक्ष्य रकबा (हेक्टेयर) |
|---|---|---|
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सब्जी |
19,000 |
24,000 |
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गेहूं |
– |
2,224 |
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दलहन |
– |
8,088 |
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मूंगफली |
– |
657 (लक्ष्य 1,000+) |
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मटर |
1,090 |
1,149 |
सब्जी उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर कदम
जिले में सब्जी का रकबा 19 हजार से बढ़कर 24 हजार हेक्टेयर हो गया है। पाली, पोड़ी उपरोड़ा और करतला ब्लॉक सब्जी उत्पादन के गढ़ बनकर उभरे हैं।
- स्थानीय बाजार पर असर: वर्तमान में कोरबा में दूसरे जिलों से सब्जियां आती हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय उत्पादन बढ़ने से बाजार में सब्जियों के दाम कम होंगे।
- ऑर्गेनिक खेती का क्रेज: शहर के नजदीकी इलाकों जैसे खरमोरा और झगरहा में किसान अब रासायनिक मुक्त (Organic) खेती कर रहे हैं। झगरहा के किसानों के मुताबिक, धान के मुकाबले सब्जी की फसल से आमदनी दोगुनी हो रही है।
कम पानी, ज्यादा मुनाफा: दलहन-तिलहन पर फोकस
धान की फसल में पानी की खपत अधिक होती है, जिसे देखते हुए किसान अब तिवरा (2628 हेक्टेयर), चना, मटर और उड़द जैसी फसलों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
“धान का लक्ष्य 514 हेक्टेयर था, लेकिन किसानों ने केवल 365 हेक्टेयर में ही इसकी बुवाई की है, जो स्पष्ट करता है कि किसान अब कम पानी वाली फसलों की ओर बढ़ रहे हैं।” – कृषि विभाग रिपोर्ट
तेल प्रोसेसिंग यूनिट से तिलहन को बढ़ावा
करतला में तेल प्रोसेसिंग यूनिट लगने के बाद से मूंगफली और सरसों की खेती में तेजी आई है। इसे देखते हुए विभाग अब पाली ब्लॉक में भी ऐसी ही यूनिट लगाने की योजना बना रहा है, ताकि किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सके।
निष्कर्ष
कृषि विभाग, उद्यानिकी और नाबार्ड के प्रोत्साहन से कोरबा के किसान अब आधुनिक और लाभकारी खेती की ओर बढ़ रहे हैं। रागी जैसी पोषक फसलों (10 हेक्टेयर) की शुरुआत भी जिले के लिए एक शुभ संकेत है।

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