कोरबा | सोमवार जनपद पंचायत कोरबा की राजनीति में आज उस वक्त गर्माहट आ गई, जब निर्वाचित सदस्यों ने प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सामान्य सभा की बैठक का सामूहिक बहिष्कार कर दिया। सदस्यों का साफ कहना है कि जब तक उन्हें विकास कार्यों के लिए पर्याप्त अधिकार और फंड नहीं मिलते, उनका यह विरोध जारी रहेगा।
मुख्य विवाद: DMF फंड में भेदभाव का आरोप
बैठक का बहिष्कार कर रहे सदस्यों ने जिला प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि जिला पंचायत सदस्यों की तर्ज पर उन्हें भी जिला खनिज न्यास मद (DMF) से विशेष कोटा मिलना चाहिए। सदस्यों के अनुसार:
- जिला पंचायत सदस्यों को विकास कार्यों के लिए सीधा फंड जारी किया जाता है, लेकिन जनपद सदस्यों को दरकिनार कर दिया गया है।
- ग्राम पंचायतों की कार्ययोजना (Action Plan) तैयार करते समय स्थानीय जनपद सदस्यों से कोई सलाह नहीं ली जाती।
- क्षेत्र भ्रमण के दौरान जनता की मांगों और समस्याओं को सुनने के बावजूद, फंड के अभाव में वे कुछ भी कर पाने में असमर्थ हैं।
“निर्वाचित होने के बाद भी हम जनभावनाओं को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। क्षेत्रवासियों के बीच हमें असहजता और अपमान का सामना करना पड़ रहा है। जब हमारे पास अधिकार ही नहीं हैं, तो बैठक में बैठने का क्या औचित्य?” — नाराज जनपद सदस्य
कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, भूमिपूजन कार्यक्रमों पर भी आपत्ति
सदस्यों ने केवल बैठक का बहिष्कार ही नहीं किया, बल्कि अपनी मांगों को लेकर कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा है। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि:
- जनपद सदस्यों की अनुशंसा पर DMF मद से राशि स्वीकृत की जाए।
- विकास कार्यों के भूमिपूजन और शासकीय कार्यक्रमों में स्थानीय सदस्यों को सम्मानजनक आमंत्रण दिया जाए।
- ग्राम पंचायतों के निर्णयों में जनपद सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
चेतावनी: मांगों की पूर्ति तक जारी रहेगा बहिष्कार
सदस्यों ने एकजुट होकर ऐलान किया है कि यह केवल सांकेतिक विरोध नहीं है। यदि प्रशासन उनकी मांगों और समस्याओं का निराकरण जल्द नहीं करता है, तो वे आगामी सभी सामान्य सभा की बैठकों का बहिष्कार करते रहेंगे।

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