कोरबा/पोंड़ीबहार: पोंड़ीबहार स्थित ‘जीवनआशा’ नामक निजी नशामुक्ति केंद्र में भर्ती एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद हड़कंप मच गया है। मामले में प्रशासनिक ढिलाई का फायदा उठाकर एनजीओ संचालक केंद्र के अन्य मरीजों को रातों-रात घर भेजकर खुद भी फरार हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
सक्ती जिले के केसला निवासी सेवानिवृत्त प्रधान पाठक चुन्नीलाल राठौर ने अपने इकलौते पुत्र सुरेंद्र कुमार राठौर को नशे की लत छुड़ाने के लिए रायपुर निवासी राजू राजपूत के एनजीओ ‘जीवनआशा’ से संपर्क किया था। 26 मार्च को संचालक सुरेंद्र को पोंड़ीबहार स्थित केंद्र ले आया। 30 मार्च को अचानक सुरेंद्र की तबीयत बिगड़ी और अस्पताल ले जाते समय चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
बिना अनुमति के चल रहा था केंद्र
जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह नशामुक्ति केंद्र पिछले एक साल से बिना किसी वैध अनुमति के संचालित हो रहा था। केंद्र के पास समाज कल्याण विभाग का आवश्यक पंजीयन भी नहीं था।
- शिफ्टिंग का खेल: संचालक ने 13 जनवरी 2026 को ही पोंड़ीबहार में यह नया भवन किराए पर लिया था, जबकि इससे पहले यह केंद्र खरमोरा में चल रहा था।
- प्रशासनिक लापरवाही: घटना के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की सुस्ती का लाभ उठाते हुए संचालक ने साक्ष्य मिटाने और पूछताछ से बचने के लिए केंद्र में ताला जड़ दिया।
40 मरीजों को रातों-रात भेजा घर
सूत्रों के अनुसार, घटना के वक्त केंद्र में 40 से अधिक लोग भर्ती थे। यदि विभाग समय रहते तत्परता दिखाता, तो इस अवैध केंद्र के संचालन और वहां दी जाने वाली सुविधाओं को लेकर कई बड़े खुलासे हो सकते थे। फिलहाल, मृतक के परिजनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों का आरोप: सुरेंद्र की मौत सामान्य नहीं है। पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता के कारण ही मुख्य आरोपी फरार होने में कामयाब रहा।
प्रमुख बिंदु:
मृतक: सुरेंद्र कुमार राठौर (सक्ती निवासी)
आरोपी संचालक: राजू राजपूत (बीरगांव, रायपुर)
एनजीओ का नाम: जीवनआशा नशामुक्ति केंद्र
स्थान: पोंड़ीबहार, कोरबा

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