कोरबा | न्यूज़ डेस्क केंद्र सरकार ने कोयला क्षेत्र में कार्यरत श्रमिकों के हितों की रक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कोयला खदान भविष्य निधि तथा विविध उपबंध अधिनियम, 1948 के दंड प्रावधानों में संशोधन करते हुए सरकार ने जुर्माने की राशि को कई गुना बढ़ा दिया है।
कड़ा हुआ दंड का प्रावधान
अब तक के पुराने कानून में नियमों के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान तो था, लेकिन आर्थिक दंड काफी कम था। नए संशोधनों के बाद अब कंपनियों और ठेकेदारों पर नियमों का पालन करने का दबाव बढ़ेगा।
जुर्माने में हुए मुख्य बदलाव:
- नया प्रावधान: अब नियमों के किसी भी उल्लंघन पर न्यूनतम 5,000 रुपये से लेकर अधिकतम 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
- पुराना प्रावधान: पहले अधिकतम जुर्माना केवल 1,000 रुपये था और बार-बार उल्लंघन पर यह महज 2,000 रुपये तक सीमित था।
पारदर्शिता के लिए नई व्यवस्था
सरकार ने केवल जुर्माना ही नहीं बढ़ाया है, बल्कि इसकी प्रक्रिया को भी व्यवस्थित किया है:
- धारा 9ए (निर्धारण अधिकारी): दंड के निर्धारण के लिए विशेष अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया है। ये अधिकारी जांच के बाद जुर्माने की राशि तय करेंगे।
- सुनवाई का अधिकार: जुर्माना लगाने से पहले प्रभावित पक्ष या कंपनी को अपनी बात रखने और सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाएगा।
- धारा 9बी (अपील की सुविधा): यदि कोई पक्ष निर्णय से संतुष्ट नहीं है, तो वह 30 दिनों के भीतर उच्च अधिकारी के पास अपील दायर कर सकता है।
विशेषज्ञों की राय: > जानकारों का कहना है कि छोटी सजा के बजाय कड़े आर्थिक दंड से कंपनियों की जवाबदेही तय होगी। इससे ठेका श्रमिकों के पीएफ (PF) अंशदान में होने वाली गड़बड़ियों पर लगाम लगेगी और कोयला खदानों में काम करने वाले मज़दूरों का भविष्य अधिक सुरक्षित होगा।

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