कोरबा | जिला समाज कल्याण विभाग कोरबा में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पहले श्रवण यंत्र योजना की पोल खुली थी, और अब बैटरी चालित साइकिल योजना को लेकर आई जानकारी ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

RTI का जवाब: मद में मिली ‘शून्य’ राशि
RTI से मिली जानकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में बैटरी चलित साइकिल योजना के लिए शासन द्वारा समाज कल्याण विभाग कोरबा को एक भी पैसा आवंटित नहीं किया गया है। विभाग ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि राशि प्राप्त न होने के कारण इस योजना के अंतर्गत:
- न तो किसी साइकिल का वितरण हुआ।
- न ही किसी प्रकार का व्यय दर्ज किया गया।
- विभाग ने इस मद की जानकारी को पूरी तरह “निरंक” बताया है।
गोपनीयता का हवाला देकर जानकारी देने से इंकार
हैरानी की बात यह है कि जब आवेदक ने हितग्राहियों के आवेदन, संबंधित दस्तावेज और वितरण के बिल-वाउचर की प्रमाणित प्रतियां मांगी, तो विभाग ने पारदर्शिता बरतने के बजाय इसे छिपाने का प्रयास किया। जन सूचना अधिकारी एवं उप संचालक हरीश सक्सेना ने RTI अधिनियम की धारा 8 का हवाला देते हुए इन दस्तावेजों को ‘गोपनीय’ बताकर देने से साफ इंकार कर दिया।
सवालों के घेरे में विभाग: लापरवाही या अनियमितता?
लगातार दो महत्वपूर्ण योजनाओं—श्रवण यंत्र और बैटरी चलित साइकिल—में या तो फंड का अभाव होना या खरीदी न होना, विभाग की मंशा पर शक पैदा करता है।
“दिव्यांगजनों के लिए जीवनयापन को सुगम बनाने वाली इन योजनाओं का ठप होना चिंताजनक है। क्या यह शासन की अनदेखी है या विभाग स्तर पर कोई बड़ी लापरवाही?”
आगे क्या?
एक ओर पात्र दिव्यांगजन उपकरणों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कागजों में योजनाएं ‘निरंक’ नजर आ रही हैं। सूत्रों की मानें तो आने वाले दिनों में समाज कल्याण विभाग के कुछ और भी काले चिट्ठे उजागर हो सकते हैं। अब देखना होगा कि इस खुलासे के बाद जिला प्रशासन क्या सख्त कदम उठाता है।

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