कोरबा | समाचार डिजिटल डेस्क छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थल सतरेंगा के जंगलों में पेड़ों की अवैध कटाई और लकड़ी तस्करी के काले कारोबार का वन विभाग ने बड़ा पर्दाफाश किया है। वन विभाग की टीम ने एक साथ छह अलग-अलग ठिकानों पर दबिश देकर भारी मात्रा में अवैध लकड़ी बरामद की है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस अवैध कारोबार में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक की संलिप्तता भी सामने आई है।
गुप्त सूचना पर विभाग की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक
वनमंडलाधिकारी (DFO) प्रेमलता यादव को लगातार सूचना मिल रही थी कि बालको वन परिक्षेत्र के सतरेंगा क्षेत्र में अवैध वनोपज का भंडारण किया जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उप वनमंडलाधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में एक विशेष रणनीति बनाई गई। बालको वन परिक्षेत्राधिकारी जयंत सरकार और नवपदस्थ रेंजर देवव्रत सिंहा के नेतृत्व में टीम ने सतरेंगा गांव में एक साथ 6 घरों को घेरा।
शिक्षक के घर मिला लकड़ी का जखीरा
जब वन विभाग की टीम ने तलाशी शुरू की, तो अधिकारी भी दंग रह गए। सरकारी स्कूल के शिक्षक जगत निर्मलकर के घर से सबसे अधिक मात्रा में लकड़ी बरामद हुई।
- कुल जब्त नग: 359 नग (चिरान)
- कुल आयतन: 5.405 घनमीटर
- अनुमानित कीमत: लगभग 4 लाख 25 हजार रुपए
- प्रजातियां: साल, बीजा, हल्दू व अन्य कीमती लकड़ियां।
किसके घर से कितनी लकड़ी मिली:
- जगत निर्मलकर (शिक्षक): 254 नग चिरान
- महेत्तर सिंह: 73 नग
- घांसीराम: 18 नग
- लच्छीराम: 10 नग
- भगतराम: 04 नग
पर्यटन की आड़ में फल-फूल रहा तस्करी का धंधा
सतरेंगा अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण पर्यटकों का केंद्र है। इसी भीड़भाड़ का फायदा उठाकर तस्कर सक्रिय रहते हैं। वन विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि यह लकड़ी कहां खपाई जानी थी और इस सिंडिकेट में और कौन-कौन शामिल है। फिलहाल सभी आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
55 अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त टीम > इस बड़े ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए बालको, कोरबा और लेमरू वन परिक्षेत्र के 55 अधिकारियों-कर्मचारियों को शामिल किया गया था। टीम में कांति कुमार कंवर, सुशील कुमार साहू, रामेश्वर सिदार, श्रवण गायकी, ओमप्रकाश भारद्वाज और अनिल कंवर जैसे अनुभवी अधिकारी शामिल रहे, जिन्होंने घंटों तक सघन तलाशी अभियान चलाया।

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