कोरबा। एसईसीएल (SECL) गेवरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम अमगांव के रोहिदास मोहल्ला के निवासियों का धैर्य अब जवाब दे गया है। प्रबंधन की कथित हठधर्मिता और भेदभावपूर्ण रवैये से नाराज ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। गुरुवार को ग्रामीणों ने मुख्य महाप्रबंधक (CGM) गेवरा को ज्ञापन सौंपकर सात दिनों का अल्टीमेटम दिया है।
2004 में हुआ था अर्जन, अब तक भुगतान नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी भूमि और संपत्तियों का अर्जन वर्ष 2004 में ही किया जा चुका है। लगभग दो दशक बीत जाने के बाद भी उन्हें अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2023 में मूल्यांकन और नापी की प्रक्रिया पूरी कर उन्हें पावती भी थमा दी गई थी, लेकिन प्रबंधन द्वारा जानबूझकर भुगतान की फाइल को लटका कर रखा गया है।
जातिगत भेदभाव का लगाया गंभीर आरोप
रोहिदास समुदाय के परिवारों ने एसईसीएल प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि उसी मोहल्ले के अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों को मुआवजा और बसाहट की सुविधा मिल चुकी है, लेकिन इस विशेष समुदाय को जानबूझकर वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर ‘जातिगत आधार पर शोषण’ का मामला करार दिया है।
124 परिवारों को भी किया गया था अपात्र घोषित
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब प्रबंधन ने ऐसा किया हो। इससे पहले भी ग्राम पंचायत के 124 परिवारों को अपात्र बताकर उनके मुआवजे की राशि रोकने का प्रयास किया जा चुका है। ग्रामीणों के अनुसार, प्रबंधन की नीति केवल प्रभावितों को परेशान करने की रह गई है।
मृत मवेशियों के साथ प्रदर्शन की चेतावनी
ग्रामीणों ने प्रबंधन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे एक अनूठा और उग्र प्रदर्शन करेंगे। अपने पैतृक व्यवसाय के प्रतीक स्वरूप, ग्रामीण मृत मवेशियों के साथ एसईसीएल गेवरा कार्यालय के समक्ष धरने पर बैठेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: एसईसीएल गेवरा क्षेत्र, ग्राम अमगांव (कोरबा)
- मुख्य मांग: लंबित मुआवजा और पुनर्वास की सुविधा।
- अल्टीमेटम: 7 कार्य दिवस।
- चेतावनी: मृत मवेशियों के साथ उग्र आंदोलन।

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