कोरबा। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल (CSEB) की पूर्व कॉलोनी में कंडम घोषित मकानों को ढहाने का काम मैनेजमेंट की लापरवाही और ठेकेदार की मनमानी की भेंट चढ़ गया है। स्थिति यह है कि 428 मकानों का डिस्मेंटल कार्य अधूरा छोड़कर ठेका कंपनी काम बंद कर भाग गई है। अब इन खंडहर हो चुके मकानों में असामाजिक तत्वों और बाहरी लोगों ने डेरा जमा लिया है।
असामाजिक तत्वों का बढ़ा आतंक, असुरक्षित महसूस कर रहे रहवासी
खाली पड़े इन मकानों में बिना किसी रोक-टोक के बाहरी लोग आकर रहने लगे हैं। स्थानीय रहवासियों का कहना है कि:
- सुरक्षा का खतरा: देर रात तक अनजान लोगों की आवाजाही से कॉलोनी की महिलाएं और बच्चे खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
- चोरी की वारदातें: कॉलोनी में पिछले कुछ समय से चोरी की घटनाओं में अचानक बढ़ोतरी हुई है।
- अवैध गतिविधियां: खाली मकानों का उपयोग नशाखोरी और अन्य असामाजिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
जुगाड़ से सजा लिए आशियाने, बिजली की भी चोरी
हैरानी की बात यह है कि जिन मकानों की खिड़की-दरवाजे निकाले जा चुके हैं, वहां कब्जाधारियों ने ईंट की जुड़ाई कर ली है या मोटे पर्दे लगाकर कब्जा कर लिया है। इतना ही नहीं, इन मकानों में अवैध बिजली कनेक्शन (कटिया मार कर) भी जोड़ लिए गए हैं, जिससे विभाग को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
शिकायत के बाद भी प्रबंधन मौन
कॉलोनी के जागरूक नागरिकों ने इस समस्या को लेकर फरवरी माह में दो बार पाड़ीमार जोन के सहायक अभियंता से लिखित शिकायत की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और सीएसईबी प्रबंधन शिकायतों को नजरअंदाज कर रहा है। रहवासियों ने यह भी अंदेशा जताया है कि ऐसे तत्वों को विभाग के कुछ कर्मचारियों का संरक्षण प्राप्त है।
“हमने कई बार लिखित में शिकायत दी है, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। अगर जल्द ही इन अवैध कब्जों को नहीं हटाया गया और कंडम मकानों को पूरी तरह डिस्मेंटल नहीं किया गया, तो कॉलोनी का माहौल पूरी तरह खराब हो जाएगा।”— स्थानीय रहवासी

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