कोरबा | रेलवे द्वारा कोरबा की लगातार की जा रही उपेक्षा और यात्री सुविधाओं के विस्तार में देरी को लेकर अब शहर का धैर्य जवाब दे गया है। टीपी नगर स्थित होटल महाराजा में कोरबा विकास समिति (रेल) की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि अब बिना उग्र आंदोलन के कोरबा को उसका हक नहीं मिलने वाला।
बैठक की मुख्य बातें:
- सांसद की मौजूदगी: क्षेत्रीय सांसद ज्योत्सना चरण दास महंत बैठक में विशेष रूप से उपस्थित रहीं।
- राजस्व बनाम सुविधा: उपस्थित नागरिकों और प्रतिनिधियों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि रेलवे कोरबा से सबसे अधिक राजस्व तो कमाता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर केवल “उपेक्षा” ही हाथ लगती है।
- एकजुटता: इस अभियान में किसी एक दल का नहीं, बल्कि भाजपा-कांग्रेस सहित सभी राजनीतिक दलों, व्यापारिक संगठनों और श्रमिक संगठनों का समर्थन है।
आगामी कार्ययोजना (15 अप्रैल को शक्ति प्रदर्शन)
समिति ने अपनी मांगों को लेकर रणनीति तैयार कर ली है:
- कलेक्टर को ज्ञापन: 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे समिति का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेगा।
- हाई-लेवल मीटिंग की मांग: प्रशासन से आग्रह किया जाएगा कि कोरबा में ही रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाए।
- दिग्गजों की भागीदारी: इस प्रस्तावित बैठक में सांसद ज्योत्सना महंत, कैबिनेट मंत्री लखनलाल देवांगन, जिले के तीनों विधायक और चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों सहित प्रमुख संगठन शामिल होंगे।
“रेलवे समय रहते चेत जाए, अन्यथा उग्र आंदोलन के लिए तैयार रहे। इसकी पूरी जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की होगी।” — कोरबा विकास समिति (रेल)
उपेक्षा के खिलाफ लामबंद हुआ शहर
बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि अब कागजी कार्यवाहियों का समय निकल चुका है। रेलवे अधिकारियों पर इस बात का पुरजोर दबाव बनाया जाएगा कि कोरबा का आम नागरिक अब और इंतजार करने के मूड में नहीं है। बैठक में चेंबर ऑफ कॉमर्स, श्रमिक संगठन, समाजसेवी, भूविस्थापित संगठन और पत्रकारों ने भारी संख्या में उपस्थिति दर्ज कराकर इस मुहिम को जन-आंदोलन का रूप देने का संकल्प लिया।

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