कोरबा। जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और डिजिटल बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिले के 40 हजार से अधिक बच्चों की ‘APAAR ID’ (Automated Permanent Academic Account Registry) बनाई जा रही है। इस संबंध में विभाग द्वारा सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
क्यों जरूरी है अपार आईडी? जानिए इसके मुख्य फायदे:
- दस्तावेजों के खोने का डर खत्म: यदि बच्चे का कोई ओरिजिनल दस्तावेज (जैसे जन्म प्रमाण पत्र, जाति या निवास) गुम हो जाता है, तो इस आईडी की मदद से उसकी दूसरी प्रति आसानी से ऑनलाइन निकाली जा सकेगी।
- एडमिशन के समय नहीं भटकेंगे परिजन: जब बच्चा पहली कक्षा या स्कूल में दाखिला लेगा, तो अभिभावकों को दस्तावेजों की फाइल लेकर भटकना नहीं पड़ेगा।
- 12 अंकों का यूनिक नंबर: इस आईडी में बच्चे का नाम, जन्मतिथि, निवास और जाति प्रमाण पत्र जैसे जरूरी दस्तावेज अपलोड कर 12 अंकों का एक यूनिक नंबर जारी किया जा रहा है।
- यूनिवर्सिटी तक आएगी काम: स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब छात्र कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेगा, तब भी यह अपार आईडी अनिवार्य होगी। इसके बिना रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकेगा।
प्राइवेट प्ले-स्कूलों की मनमानी और दिक्कतों से मिलेगी राहत
दरअसल, जिले में बड़ी संख्या में नर्सरी और प्री-नर्सरी स्कूल संचालित हैं, लेकिन अधिकांश के पास अपना यूडाइस (UDISE) नंबर नहीं होता। ये स्कूल बच्चों का दाखिला तो कर लेते हैं, लेकिन उनकी अपार आईडी नहीं बना पाते। जब बच्चा पहली कक्षा में जाता है, तब पालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
विभाग का फैसला: इसी समस्या को देखते हुए शासन ने महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से आंगनबाड़ी स्तर पर ही शून्य से 6 वर्ष तक के बच्चों का ‘अस्थाई शैक्षणिक रिकॉर्ड’ (APAAR ID) तैयार करने का निर्णय लिया है।
एक बार आंगनबाड़ी में यह रिकॉर्ड बन जाने के बाद, आगे की पढ़ाई और नए स्कूल में प्रवेश के दौरान अलग से कोई दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी। सिर्फ अपार आईडी नंबर से ही सारा काम हो जाएगा।

7974214821


