हाइलाइट्स:
मड़वारानी स्टेशन पर अब 6 लाइनें: अतिरिक्त अप और डाउन लूप लाइन की कमीशनिंग पूरी।
जापानी और ऑस्ट्रियाई तकनीक: इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और डिजिटल एक्सल काउंटर से मानवीय भूल की गुंजाइश खत्म।
शून्य रद्दीकरण (Zero Cancellation): बिना किसी ट्रेन को रद्द किए बिलासपुर मंडल ने पूरा किया काम।
सुरक्षित सफर: फिश प्लेट मुक्त ट्रैक और एटी वेल्डिंग से रेल फ्रैक्चर का खतरा खत्म।
कोरबा / बिलासपुर।
रेल यात्रियों के लिए सफर को सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध बनाने की दिशा में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर मंडल ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। चांपा-गेवरारोड सेक्शन के महत्वपूर्ण मड़वारानी स्टेशन पर अतिरिक्त लूप लाइन (अप और डाउन) की कमीशनिंग का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। अब इस स्टेशन पर कुल 6 लाइनें उपलब्ध हो गई हैं, जिससे ट्रेनों की लेटलतीफी बीते दिनों की बात हो जाएगी।
लेटलतीफी से मिलेगी बड़ी राहत
अक्सर मुख्य रेल मार्ग पर किसी सुपरफास्ट या एक्सप्रेस ट्रेन को रास्ता देने (क्रॉसिंग) के लिए पैसेंजर ट्रेनों या मालगाड़ियों को आउटर या पिछले स्टेशनों पर घंटों खड़ा कर दिया जाता है। मड़वारानी स्टेशन पर हुए इस अपग्रेडेशन के बाद अब यात्रियों को इस तरह की परेशानी से बड़ी राहत मिलने वाली है।
अब यदि इस रूट पर पीछे से कोई सुपरफास्ट ट्रेन आ रही है, तो लोकल पैसेंजर या मालगाड़ी को किसी दूर के स्टेशन पर रोकने की जरूरत नहीं होगी। मड़वारानी की अतिरिक्त लूप लाइनों पर उन्हें खड़ा कर एक्सप्रेस को तुरंत रास्ता दे दिया जाएगा, जिससे सभी ट्रेनें अपने सही समय पर चल सकेंगी।
जापानी और ऑस्ट्रियाई तकनीक से लैस हुआ यार्ड
मड़वारानी स्टेशन के इस कायाकल्प की सबसे बड़ी यूएसपी यहां स्थापित की गई अत्याधुनिक सिग्नलिंग और सेफ्टी सिस्टम है:
- जापानी इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग: रेलवे ने अब पारंपरिक पैनल इंटरलॉकिंग को पूरी तरह अलविदा कह दिया है। इस विश्वप्रसिद्ध जापानी तकनीक के आने से ट्रेनों का रूट सेट करने और सिग्नल देने का पूरा काम कंप्यूटर आधारित हो गया है, जिससे मानवीय चूक की संभावना खत्म हो गई है।
- मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर: ऑस्ट्रियाई तकनीक पर आधारित यह सिस्टम ट्रैक पर लगाया गया है। यह सुनिश्चित करता है कि जब तक एक ट्रैक पूरी तरह खाली न हो, दूसरी ट्रेन को उस पर हरी झंडी (सिग्नल) मिल ही नहीं सकती। इससे आमने-सामने या पीछे से होने वाली टक्करों का खतरा शून्य हो जाता है।
स्मार्ट मैनेजमेंट: बिना कोई ट्रेन रद्द किए पूरा हुआ काम
आमतौर पर जब भी रेलवे किसी स्टेशन पर बड़ा निर्माण या रीमॉडलिंग का काम करता है, तो यात्रियों को ट्रेनों के रद्दीकरण (Cancellation) या भारी देरी का सामना करना पड़ता है। लेकिन इस बार बिलासपुर मंडल ने मैनेजमेंट का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए ‘शैडो ब्लॉक रणनीति’ का उपयोग किया। मड़वारानी में लूप लाइन जोड़ने के लिए मुख्य ब्लॉक के दौरान ही आसपास के स्टेशनों पर भी कई इंजीनियरिंग और सुरक्षा कार्य एक साथ पूरे कर लिए गए, जिससे यात्रियों को कोई असुविधा नहीं हुई।
सिविल इंजीनियरिंग का कमाल: पटरियों की बढ़ी उम्र
ट्रेनों को रफ्तार देने और पटरियों को टूटने से बचाने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है:
- यार्ड के भीतर लगभग 595.69 मीटर पुरानी पटरियों को उखाड़कर नई और भारी क्षमता वाली रेल बिछाई गई है।
- ट्रैक को जोड़ने के लिए 126 एटी वेल्डिंग (AT Welding) के काम पूरे किए गए हैं, जिससे ट्रेनें बिना झटका खाए एक लाइन से दूसरी लाइन पर जा सकेंगी।
- ट्रैक से 44 फिश प्लेटेड जॉइंट्स को वेल्डिंग के जरिए पूरी तरह खत्म कर दिया गया है और 40 ग्लूड जॉइंट्स का नवीनीकरण किया गया है। फिश प्लेट मुक्त ट्रैक होने से भविष्य में रेल फ्रैक्चर का खतरा न के बराबर रहेगा।
बढ़ेगी रफ्तार, घटेगा दबाव:
चांपा-गेवरारोड सेक्शन कोयला ढुलाई और यात्री परिवहन दोनों के लिहाज से बेहद व्यस्त रूट है। मड़वारानी में कैपेसिटी बढ़ने से पूरे सेक्शन पर ट्रेनों का दबाव कम होगा और गाड़ियों की रफ्तार में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

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