कोरबा। बिजली कर्मचारियों की समस्याओं और सामाजिक सुरक्षा को लेकर ‘जनता यूनियन’ ने अपनी आवाज बुलंद की है। यूनियन के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रांताध्यक्ष अनिल द्विवेदी के नेतृत्व में पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के कोरबा प्रवास के दौरान उनसे विशेष मुलाकात की। इस दौरान नेताओं ने बिजली कर्मियों के हितों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और एक मांग पत्र सौंपा। इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व कैबिनेट मंत्री जयसिंह अग्रवाल से भी भेंट कर कर्मचारियों की जमीनी समस्याओं से अवगत कराया।
इन प्रमुख मांगों पर हुई विस्तार से चर्चा:
बैठक के दौरान जनता यूनियन ने बिजली विभाग और कर्मचारियों से जुड़े कई गंभीर मुद्दों को प्रमुखता से उठाया, जो निम्नलिखित हैं:
- पुरानी पेंशन योजना (OPS): बिजली कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को तत्काल लागू करने की मांग।
- ठेका व आउटसोर्सिंग का विरोध: विभाग में ठेका और आउटसोर्स प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर नियमित भर्ती करने पर जोर।
- संविदा नियमितीकरण: लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मियों को नियमित करने की मांग।
- सुरक्षा और भत्ते: कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले विद्युत कर्मियों के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था, भत्तों और अन्य कर्मचारी सुविधाओं में सुधार।
“प्रदेश के बिजली कर्मचारी 24 घंटे कठिन और जोखिमभरे हालातों में निरंतर सेवा दे रहे हैं। इसलिए उनके हितों की रक्षा करना और उन्हें सामाजिक सुरक्षा (Social Security) प्रदान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”— जनता यूनियन पदाधिकारी
मुलाकात के दौरान ये रहे उपस्थित:
इस महत्वपूर्ण बैठक और मुलाकात के दौरान जनता यूनियन के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
- प्रांतीय उपाध्यक्ष: सम्मेलाल श्रीवास
- प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य: सागर देवांगन, प्रमोद कुमार राठौर
- कोरबा सर्किल: अध्यक्ष लक्ष्मी प्रसाद यादव, उपाध्यक्ष मोहम्मद नासिर खान, नीलांबर शर्मा
- प्रचार विंग: प्रचार सचिव दिलेश्वर प्रजापति, सह प्रचार सचिव अरुण सागर, अनूप जोलहे
- जनरेशन शाखा (पश्चिम): अध्यक्ष गेंदराम साहू, कोषाध्यक्ष जॉर्ज के थंकाचंद
- जनरेशन शाखा (पूर्व): अध्यक्ष सुखीदास महंत
ठोस निर्णय की उम्मीद:
चर्चा के अंत में जनता यूनियन के पदाधिकारियों ने विश्वास जताया कि पूर्व उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेताओं के माध्यम से कर्मचारी हितों से जुड़े इन संवेदनशील मुद्दों पर सकारात्मक पहल होगी और सरकार भविष्य में कर्मचारियों के पक्ष में ठोस निर्णय लेगी।

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