कोरबा। जिले में गंभीर अपराधों के त्वरित निराकरण और अपराधियों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के नेतृत्व में लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसके बावजूद बांकीमोंगरा थाना क्षेत्र में जून माह में हुई दो जुड़ी घटनाओं की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में बनी हुई है।
अभी 3 जुलाई की रात उरगा थाना क्षेत्र के कुदुरमाल स्थित मीरा रिसोर्ट के बाहर वाहन से कुचलकर एक युवक की हत्या किए जाने की घटना सामने आने के बाद लोगों को 6-7 जून की मध्यरात्रि की वह घटना फिर याद आ गई, जब एएसआई रामनारायण रात्रे के पुत्र चंद्रमणि उर्फ दादू को बोलेरो वाहन से कुचल दिया गया था। गंभीर रूप से घायल चंद्रमणि ने छह दिन बाद उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था।
क्या है पूरा मामला?
बताया जाता है कि हादसे के बाद युवा पत्रकार अरविंद राठौर अपने साथी साहिल के साथ बोलेरो का पीछा करते हुए बलगी मोड़ तक पहुंचे थे। आरोप है कि वहां 20 से 25 लोगों ने उन्हें घेरकर बेरहमी से पीटा। हमलावरों ने उनके पास रखी करीब एक लाख रुपये की नकदी, एक आई फोन सहित 2 मोबाइल, सोने की चेन और सोने की अंगूठी लूट ली तथा बंदूक की नोक पर दो राउंड हवाई फायरिंग भी की।
गंभीर रूप से घायल पत्रकार को रात करीब तीन बजे थाना ले जाया गया, लेकिन घटना के लगभग एक माह बाद भी अधिकांश हमलावर पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। पुलिस ने इस मामले में अपहरण, हत्या का प्रयास, बलवा, डकैती और आर्म्स एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज किया है।
बाद में चंद्रमणि की मृत्यु के बाद विशेष टीम गठित कर बोलेरो चालक कुणाल साहू को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार पूछताछ में उसने योगेंद्र प्रताप बघेल उर्फ (योगी) के साथ मिलकर घटना को अंजाम देने की बात स्वीकार की, लेकिन पुलिस द्वारा मुख्य आरोपी योगेंद्र प्रताप बघेल उर्फ (योगी) को अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है।
बड़ा सवाल: हमलावर हैं तो पहचान क्यों नहीं..?
इसी बीच पुलिस ने पत्रकार से मारपीट, अपहरण, आर्म्स एक्ट और डकैती के मामले में दो अन्य युवकों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी, लेकिन उनके नाम सार्वजनिक नहीं किए गए। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आज तक इन दोनों की शिनाख्त पीड़ित पत्रकार अरविंद से क्यों नहीं कराई गई?
परिजनों का कहना है कि यदि यही हमलावर हैं तो उनकी पहचान कराई जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि वास्तविक आरोपियों की जगह निर्दोष लोगों को जेल भेज दिया गया हो? हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
पूरे घटनाक्रम ने बांकीमोंगरा थाना प्रभारी और पुलिस स्टाफ की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं:
- आखिर 20 से 25 हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी में पुलिस अब तक सफल क्यों नहीं हो सकी?
- यदि दो आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं तो बाकी आरोपियों तक पहुंचने में आखिर बाधा क्या है?
- क्या आरोपियों को न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत राहत दिलाने में अप्रत्यक्ष सहयोग किया जा रहा है?
परिजनों का संगीन आरोप: “पुलिस ने कहा- गाड़ी में डीजल नहीं है”
परिजनों का आरोप है कि घायल पत्रकार का बयान लेने में भी अनावश्यक विलंब किया गया। उच्च अधिकारियों से शिकायत के बाद ही थाना प्रभारी अस्पताल पहुंचकर बयान दर्ज करने पहुंचे।
उनका यह भी कहना है कि यदि घटना वाली रात पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाई होती तो कई हमलावर उसी समय गिरफ्तार किए जा सकते थे। परिजनों के मुताबिक क्षेत्र के एक युवा नेता ने घटना वाली रात पुलिस को फोन कर गश्त बढ़ाने का आग्रह किया था, लेकिन कथित तौर पर पुलिस ने “वाहन में डीजल-पेट्रोल नहीं होने” की बात कहकर असमर्थता जताई। बताया जाता है कि अधिकांश आरोपी पैदल ही भागे थे, जिन्हें पुलिस आसानी से पकड़ सकती थी।
चर्चा में एक और सवाल: क्या ‘डीजल चोरी कनेक्शन’ बना बाधा?
क्षेत्र में चर्चा है कि मामला कथित डीजल चोरी गिरोह से जुड़ा होने के कारण कार्रवाई अपेक्षित गति से नहीं बढ़ सकी है। लोगों में यह भी चर्चा है कि बाद में घटित कई गंभीर मामलों में पुलिस ने जिस तेजी से कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया, वैसी तत्परता पत्रकार पर हुए हमले में दिखाई नहीं दी।
गौरतलब है कि डीजल चोरी से जुड़े प्रकरण में बांकीमोंगरा थाना के कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका सामने आने पर पुलिस अधीक्षक द्वारा पूर्व में निलंबन की कार्रवाई भी की जा चुकी है। ऐसे में जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या डीजल चोरों से वास्ता रखने वाले यह हमलावर पुलिस स्टाफ को अपने प्रभाव में रखे हुए हैं?
आधिकारिक पक्ष: अब तक पुलिस ने क्या की कार्रवाई?
पुलिस सहायता केंद्र मानिकपुर क्षेत्र में 6-7 जून की रात घटित हत्या के गंभीर प्रकरण में प्रार्थी शुभम सिंह बघेल की रिपोर्ट पर थाना कोतवाली में अपराध क्रमांक 500/2026 धारा 109, 103(1), 3(5) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है।
पुलिस अधीक्षक द्वारा गठित विशेष टीमों ने 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की जांच की तथा 100 से अधिक लोगों से पूछताछ की। इसके आधार पर मुख्य आरोपी के साथी राजेन्द्र साहू उर्फ कुनाल साहू (उम्र 22 वर्ष, निवासी कड़ारी, जिला सक्ती; हाल मुकाम विकास नगर कुसमुंडा) को गिरफ्तार किया गया।
- बरामदगी: आरोपी के मेमोरेंडम कथन के आधार पर घटना में प्रयुक्त बोलेरो वाहन क्रमांक CG-12 BD-5025 को जप्त किया गया है।
- डकैती में संलिप्तता: विवेचना में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी कुनाल साहू बलगी में पत्रकार के साथ हुई डकैती की घटना में भी संलिप्त था। उक्त डकैती प्रकरण में पूर्व में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे एक वेन्यू कार एवं स्कूटी जप्त की जा चुकी है। पुलिस का कहना है कि प्रकरण में अन्य आरोपियों एवं साक्ष्यों के संबंध में विवेचना जारी है।

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