कोरबा। शनिवार दोपहर उस वक्त शहर में हड़कंप मच गया, जब अचानक जिले भर के करीब 49 प्रमुख चौराहों और रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात हो गया। पुलिस के आला अफसरों को खुद मौके पर मोर्चा संभाले देख राहगीर और स्थानीय लोग किसी बड़ी अनहोनी या वारदात की आशंका से सहम गए। हालांकि, कुछ ही देर बाद जब असली माजरा सामने आया, तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली। दरअसल, यह कोई वास्तविक वारदात नहीं, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए कोरबा पुलिस द्वारा की गई एक सोची-समझी ‘मॉकड्रिल’ थी।
2 घंटे तक चला सघन चेकिंग अभियान
पुलिस कप्तान सिद्धार्थ तिवारी के सख्त निर्देश और एएसपी लखन पटले के कुशल मार्गदर्शन में शनिवार दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक पूरे जिले में यह विशेष अभियान चलाया गया। जिले के सभी थाना और चौकी क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले 49 संवेदनशील पॉइंट पर मजबूत नाकेबंदी की गई थी।
सड़क पर उतरे आला अफसर, संदिग्धों की हुई जांच
इस दो घंटे की मॉकड्रिल के दौरान तैनात अफसरों और जवानों ने हर आने-जाने वाले संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की बारीकी से जांच-पड़ताल की। पुलिस के आला अधिकारी लगातार फील्ड पर रहकर इस पूरी प्रक्रिया की लाइव मॉनिटरिंग कर रहे थे, ताकि किसी भी स्तर पर चूक न हो।
क्यों की गई यह मॉकड्रिल?
पुलिस विभाग के अनुसार, इस औचक मॉकड्रिल को आयोजित करने के पीछे मुख्य उद्देश्य थे:
- तत्परता की जांच: आपातकालीन स्थिति (जैसे कोई बड़ी वारदात या अपराधी के भागने की स्थिति) में पुलिस बल कितनी तेजी से एक्टिव होता है।
- समन्वय क्षमता (Coordination): अलग-अलग थानों और चौकियों के बीच आपसी तालमेल को परखना।
- त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response): संकट के समय कम से कम समय में प्रभावी नाकेबंदी करने की दक्षता का मूल्यांकन करना।
अधिकारियों का संदेश: पुलिस प्रशासन ने जनता से अपील की है कि ऐसी मॉकड्रिल सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए बेहद जरूरी हैं, इसलिए घबराएं नहीं बल्कि पुलिस का सहयोग करें।

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