कोरबा। कोरबा प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह गुरुवार को उस वक्त सियासी अखाड़े में तब्दील हो गया, जब मंच से ही कांग्रेस और भाजपा के दिग्गज नेताओं के बीच तीखी बहस छिड़ गई। पत्रकारों के इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे डिप्टी सीएम अरुण साव की मौजूदगी में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने प्रदेश सरकार के ढाई साल के कार्यकाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
मंच से जयसिंह अग्रवाल का सीधा हमला
समारोह को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल ने नई कार्यकारिणी को बधाई देने के साथ ही राज्य सरकार के विकास के दावों की हवा निकाल दी।
- ढाई साल की ढाई उपलब्धियां बताएं: जयसिंह ने डिप्टी सीएम अरुण साव और स्थानीय विधायक व मंत्री लखनलाल देवांगन की मौजूदगी में चुनौती देते हुए कहा, “सरकार अपनी ढाई साल की सिर्फ ढाई उपलब्धियां ही बता दे।”
- सार्वजनिक बहस की चुनौती: उन्होंने सरकार के किसी भी मंत्री को कोरबा के विकास कार्यों पर खुले मंच से बहस करने का न्योता दिया।
- वास्तविक स्थिति देखने का सुझाव: जयसिंह ने कहा कि प्रभारी मंत्री अरुण साव औपचारिक कार्यक्रमों के बजाय कोरबा, कुसमुंडा गेवरा, दीपका, कटघोरा और बालको का दौरा करें, ताकि उन्हें विकास की असल तस्वीर दिखे।
- महापौर का बचाव, सरकार पर निशाना: उन्होंने महापौर संजू देवी राजपूत के 16 महीने के कार्यकाल को छोटा बताते हुए उन पर टिप्पणी से परहेज किया, लेकिन प्रदेश सरकार के कार्यकाल को आड़े हाथों लिया।
डिप्टी सीएम अरुण साव का कड़ा पलटवार
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्य अतिथि व डिप्टी सीएम अरुण साव ने पूर्व मंत्री के बयानों पर पलटवार करते हुए उन्हें आईना दिखाया:
“जयसिंह अग्रवाल को पहले अपने कार्यकाल का आत्ममंथन करना चाहिए। 5 सालों तक प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और महापौर भी उनके घर से ही थीं, लेकिन जनता ने उनके कामकाज का जवाब चुनाव में दे दिया है। हमारी सरकार ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ पूरे छत्तीसगढ़ के विकास के लिए काम कर रही है।”— अरुण साव, उप मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़)
गरम हुआ कोरबा का राजनीतिक माहौल
पत्रकारों के सम्मान और शपथ ग्रहण के लिए आयोजित यह मंच दिन भर चर्चा का केंद्र बना रहा। कार्यक्रम में मौजूद शहर विधायक व मंत्री लखनलाल देवांगन, महापौर संजूदेवी राजपूत सहित सभी अतिथि इस अचानक बदले राजनीतिक तापमान के साक्षी बने।
एक तरफ जहां कांग्रेस विकास के दावों को चुनौती दे रही है, वहीं भाजपा चुनावी जनादेश और अपनी प्रतिबद्धता का हवाला देकर पलटवार कर रही है। प्रेस क्लब के मंच से शुरू हुई यह नोकझोंक आने वाले दिनों में कोरबा की राजनीति में और तूल पकड़ने के संकेत दे रही है।

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