कोरबा | अपनी अनूठी जैव विविधता (Biodiversity) के लिए प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला एक बार फिर चर्चा में है। यहाँ के घने जंगलों में ‘दहीमन’ नाम का एक दुर्लभ औषधीय पेड़ पाया गया है, जिसे वैज्ञानिक दृष्टि से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में बेहद कारगर माना जा रहा है।
वैज्ञानिकों की खोज: औषधीय गुणों का खजाना
छत्तीसगढ़ विज्ञानसभा के विशेषज्ञों ने अपनी खोज यात्रा के दौरान बालको से लगे ग्राम बेला से कॉफी पॉइंट तक के 10 किलोमीटर के दायरे में इस पेड़ की मौजूदगी दर्ज की है। वैज्ञानिकों के अनुसार, दहीमन की पत्तियों और छाल में कई महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते हैं:
- प्रमुख तत्व: फेनोल्स, टरपेनॉइड्स, सैपोनिन्स, वोलाटाइल ऑयल, फ्लेवोनॉइड्स और ग्लाइकोसाइड्स।
- विशेष एक्सट्रैक्ट: इसमें मौजूद ‘थेनालिक एक्सट्रैक्ट’ इसे खास बनाता है।
- प्रभाव: इसमें एंटीफंगल, एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-कैंसर गुण प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
पत्तियों की अनोखी विशेषता: प्राचीन काल का ‘सीक्रेट मैसेज’
दहीमन का पेड़ न केवल औषधीय रूप से बल्कि अपनी भौतिक विशेषता के लिए भी अद्भुत है।
“अगर आप इसकी पत्ती के ऊपर कुछ भी लिखेंगे, तो वह लिखावट अपने आप पत्ती के दूसरी तरफ उभर आती है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि यह इसमें मौजूद टैनिन और फेनोलिक तत्वों की आपसी रासायनिक क्रिया के कारण होता है। प्राचीन काल में गुप्तचर संदेशों के आदान-प्रदान के लिए इन पत्तों का उपयोग किया करते थे।
संरक्षण की गुहार
जिले के जंगलों में दहीमन के साथ-साथ लगभग 60 प्रकार की अन्य दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों की पहचान की जा चुकी है। हालांकि, ये पौधे अब विरल (Rare) होते जा रहे हैं। विज्ञान विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन बहुगुणी पेड़ों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास नहीं किए गए, तो भविष्य के लिए यह अनमोल संपदा नष्ट हो सकती है।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: कोरबा (बेला से कॉफी पॉइंट का जंगल)।
- खोजकर्ता: छत्तीसगढ़ विज्ञानसभा के विज्ञानी।
- उपयोग: कैंसर, फंगल इन्फेक्शन और अन्य बीमारियों का उपचार।

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