कोरबा | जमीन खरीदी-बिक्री में जालसाजी करने वाले प्रोफेसर सुरेशचन्द्र तिवारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश डॉ. ममता भोजवानी की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को सुपर सेशन वारंट के जरिए जेल भेजने का कड़ा आदेश जारी किया है।
अदालत की सख्त टिप्पणी: “उदारता बरतना न्यायोचित नहीं”
सुनवाई के दौरान विचारण न्यायालय ने स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी के इस प्रकरण में आरोपी के प्रति किसी भी प्रकार की सहानुभूति दिखाना न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध होगा। कोर्ट ने आरोपी सुरेशचन्द्र तिवारी को धारा 420 (IPC) के तहत दोषी पाते हुए निम्नलिखित सजा सुनाई:
- 3 वर्ष का कठोर कारावास।
- 10,000 रुपये का अर्थदंड (जुर्माना न भरने पर 6 माह की अतिरिक्त जेल)।
₹25.50 लाख का भुगतान करने का निर्देश
न्यायालय ने प्रार्थी जगदीश मिश्रा को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए धारा 357 (CrPC) का उपयोग किया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि:
- आरोपी द्वारा ली गई मूल राशि 16,50,000 रुपये लौटानी होगी।
- वर्ष 2016 से अब तक का 6% साधारण ब्याज भी देना होगा।
- कुल 25,50,000 रुपये का भुगतान निर्णय की तारीख से 3 माह के भीतर करना अनिवार्य है।
विशेष नोट: यदि आरोपी निर्धारित समय में इस राशि का भुगतान नहीं करता है, तो इसकी वसूली ‘जुर्माने की वसूली’ की तरह सख्ती से की जाएगी।
पत्नी दोषमुक्त, प्रोफेसर की सजा बरकरार
मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब न्यायालय ने अपीलार्थी सुधा तिवारी को धारा 420 और 120-B के आरोपों से दोषमुक्त (बरी) कर दिया। वहीं, सुरेशचन्द्र तिवारी को धारा 120-B (साजिश) से तो राहत मिली, लेकिन मुख्य धारा 420 के तहत सजा को बरकरार रखा गया है।
अदालत ने अभियोजन और प्रार्थी पक्ष की उस अपील को भी खारिज कर दिया जिसमें सजा को और बढ़ाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने माना कि 3 साल का कारावास इस मामले में अधिकतम और पर्याप्त दंड है।
प्रमुख बिंदु एक नजर में:
विवरण विवरण जानकारी
- दोषी प्रो. सुरेशचन्द्र तिवारी
- धारा 420 भा०दं०सं० (IPC)
- सजा 3 साल कठोर कारावास
- कुल हर्जाना ₹25,50,000 (ब्याज सहित)
- न्यायाधीश डॉ. ममता भोजवानी।
तीन दाण्डिक अपील में एक साथ की गई सुनवाई
उक्त तीनों दाण्डिक अपील प्रकरण, न्यायालय सत्यानंद प्रसाद, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोरबा के दाण्डिक प्रकरण क्रमांक 2912/2022 पक्षकार छ.ग. राज्य विरुद्ध सुरेश चन्द्र तिवारी +1 अन्य, अंतर्गत धारा 420, 120 बी भा.दं.सं. में घोषित निर्णय दिनांक 6-05-2025 जिसके द्वारा आरोपीगण को उक्त अपराध धारा में दोषसिद्ध किया गया है, से व्यथित होकर प्रस्तुत की गई। दाण्डिक अपील क्रमांक 38/2025, 39/2025 क्रमशः अभियोजन एवं प्रार्थीगण द्वारा दण्डादेश में वृद्धि किये जाने के निवेदन के साथ, वहीं दाण्डिक अपील क्रमांक 34/2025 को अभियुक्तगण/अपीलार्थीगण द्वारा उनकी दोषसिद्धि के विरुद्ध प्रस्तुत करते हुए विचारण के आलोच्य निर्णय को अपास्त कर उन्हें दोषमुक्त किये जाने की याचना के साथ प्रस्तुत की गई थी। चूंकि उक्त तीनों अपील एक ही निर्णय से उत्पन्न हुए, अतः तीनों अपीलों को इस निर्णय के माध्यम से एक साथ निर्णीत किया गया है।
यह है पूरा मामला
दिनांक 10.07.2020 को लिखित शिकायत पत्र मानिकपुर पुलिस सहायता केंद्र( थाना- कोतवाली) में प्रार्थी जगदीश मिश्रा द्वारा प्रस्तुत किया गया। वह मित्र मंडल कॉलोनी, साकेत विहार पटना, जिला-पटना (बिहार), हाल मुकाम ए-104, स्वर्ण रेसीडेंसी, सीपत रोड राजकिशोर नगर बिलासपुर (छ.ग.) का निवासी है। उसका छोटा भाई मदन मिश्रा, पिता स्व. रघुनाथ मिश्रा, एसईसीएल दीपका में जनरल मैंनेजर के पद पर वर्ष 2012-14 के बीच कार्यरत था तथा स्वयं वह अंडर सेकेट्ररी बिहार सरकार की नौकरी से सेवानिवृत्त हो गया है। सेवानिवृत्त होने के पश्चात् प्राप्त राशियों के सदुपयोग के लिए उसे एक भूमि क्रय करने की आवश्यकता थी। अरूण त्रिपाठी एसईसीएल में दीपका गेवरा क्षेत्र में ठेकेदारी करते थे, उन्होंने उसके भाई मदन मिश्रा को बताया कि दादरखुर्द निवासी सुरेशचंद तिवारी अपनी भूमि का विक्रय कर रहे हैं। जिस पर वह और उसका छोटा भाई मदन मिश्रा, अरूण त्रिपाठी के साथ सुरेशचंद तिवारी के घर पहुंचे। तब सुरेश तिवारी ने बताया कि उनकी एक भूमि, जो उनकी पत्नी सुधा तिवारी के नाम पर है और ग्राम दादरखुर्द में स्थित है, जिसका खसरा नंबर पूर्व 529/3/क/2, नया खसरा नंबर 905/2 है, में से 12 डिसमिल भूमि को विक्रय करना चाहते हैं, उसके बाद सुरेश तिवारी ने जमीन दिखाई और पसंद आने पर सौदा कर 16 लाख 50 हजार रुपये का लेन-देन कर जमीन रजिस्ट्री करा दी गई। नामान्तरण के दौरान पता चला कि उक्त जमीन तो इनके नाम पर है ही नहीं, व धोखा हुआ है। पीड़ित ने जब अपने रुपए वापस मांगे तो उसके साथ मारपीट करते हुए धमकी भी दी गई। पीड़ित द्वारा षड्यंत्रपूर्वक ठगी करने की शिकायत दर्ज कराई जिस पर सुरेशचंद्र तिवारी व श्रीमती सुधा तिवारी पर धारा 420, 120 बी के तहत जुर्म दर्ज कर प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। विचाराधीन मामले में न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी सत्यानंद प्रसाद ने दोषसिद्ध पाते हुए दण्डादेश पारित किया था। इसी आदेश पर अपील की गई थी।

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