कोरबा | छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में समाज कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत हुए एक बड़े खुलासे में यह बात सामने आई है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग द्वारा श्रवण यंत्र (Hearing Aids) की एक भी यूनिट नहीं खरीदी गई है।
RTI से हुआ चौंकाने वाला खुलासा
सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में समाज कल्याण विभाग के उप संचालक एवं जन सूचना अधिकारी हरीश सक्सेना ने आधिकारिक पुष्टि की है कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में श्रवण यंत्र योजना मद से कोई भी खरीदी नहीं की गई है।
उठ रहे हैं ये गंभीर सवाल
इस जानकारी के सार्वजनिक होने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मुख्य रूप से ये तीन सवाल चर्चा का विषय बने हुए हैं:
- बजट का अभाव: क्या शासन के पास इस महत्वपूर्ण योजना के लिए फंड की कमी है?
- हितग्राहियों की अनदेखी: यदि खरीदी ही नहीं हुई, तो जिले के नए दिव्यांग हितग्राहियों को सहायता कैसे मिल रही है?
- प्रशासनिक शिथिलता: क्या विभाग आवेदनों को गंभीरता से नहीं ले रहा है?
सियासी पारा चढ़ा: कांग्रेस के आरोपों को मिला बल
राजनीतिक दृष्टि से भी यह मुद्दा तूल पकड़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस पार्टी लगातार प्रदेश सरकार पर योजनाओं में फंड की कटौती और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगाती रही है। आरटीआई से प्राप्त यह डेटा अब विपक्ष के लिए एक मजबूत हथियार बन सकता है, जिससे विभाग की घेराबंदी तय मानी जा रही है।
गोपनीयता का हवाला
जन सूचना अधिकारी हरीश सक्सेना ने स्पष्ट किया है कि जहां तक हितग्राहियों के व्यक्तिगत दस्तावेजों और आवेदनों का सवाल है, उन्हें RTI अधिनियम की धारा 8 के तहत सुरक्षा कारणों और निजता के चलते साझा नहीं किया जा सकता।
निष्कर्ष: श्रवण यंत्र जैसी बुनियादी जरूरत की खरीदी न होना विभाग की मंशा और बजट प्रबंधन पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस पर क्या सफाई पेश करता है और पेंडिंग आवेदनों का भविष्य क्या होगा।

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