कोरबा | प्रदेश में गर्मी का पारा 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त है। इस भीषण गर्मी में कोयला खदानें किसी ‘आग के गोले’ से कम नहीं नजर आ रही हैं। खदानों में काम करने वाले मजदूरों पर मंडराते हीट स्ट्रोक और लू के खतरे को देखते हुए खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) ने सख्त रुख अपनाया है। DGMS ने एक विशेष सर्कुलर जारी कर प्रबंधन को सुरक्षा निर्देशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।
एकाग्रता की कमी बन सकती है हादसों की वजह
DGMS द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, जब शरीर का तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाता है, तो इंसान की एकाग्रता घटने लगती है। हाथ-पैर का तालमेल बिगड़ने से कार्यस्थल पर गलतियों की गुंजाइश बढ़ जाती है, जो बड़े हादसों को निमंत्रण दे सकती है। विशेषकर भूमिगत खदानों (Underground Mines) में गर्म चट्टानें, मशीनों की ऊष्मा और सुरक्षात्मक कपड़ों के कारण खतरा और भी गंभीर हो जाता है।
इन कर्मियों को है सबसे ज्यादा जोखिम
सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि शुगर, बीपी, मोटापा और शराब का सेवन करने वाले कर्मियों के साथ-साथ बुजुर्गों और पूर्व में हीट स्ट्रोक झेल चुके मजदूरों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। प्रबंधन को निर्देशित किया गया है कि वे ‘लेट्स स्टे कूल, स्टे सेफ’ के मंत्र के साथ सुरक्षित खनन सुनिश्चित करें।
DGMS के 5 अहम निर्देश: जिनका पालन है अनिवार्य
प्रबंधन और मजदूरों के लिए महानिदेशालय ने निम्नलिखित पांच बिंदुओं पर जोर दिया है:
- एक्यूमेटाइजेशन (काम की आदत): नए या लंबी छुट्टी (7 दिन) से लौटे कर्मियों पर अचानक काम का बोझ न डालें। पहले दो दिन केवल 20-30% काम दें, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाकर सातवें दिन पूर्ण कार्यभार दें।
- हाइड्रेशन का नियम: हर सेक्शन में 10-15 डिग्री सेल्सियस ठंडा और हल्का नमकीन पानी उपलब्ध हो। कर्मियों को सलाह दी गई है कि वे हर 15-20 मिनट में कम से कम एक कप पानी जरूर पिएं।
- कूल रेस्ट शेड: खदानों के भीतर छायादार शेड का निर्माण हो। सुपरवाइजरों को जिम्मेदारी दी गई है कि वे कर्मियों में डिहाइड्रेशन के लक्षणों पर नजर रखें और बारी-बारी से उन्हें आराम दें।
- शिफ्ट पूर्व सावधानी: ड्यूटी से 8-12 घंटे पहले शराब का सेवन सख्त वर्जित है। कर्मियों को अच्छी नींद लेने, पौष्टिक भोजन करने और खाली पेट काम पर न आने की सलाह दी गई है।
- फर्स्ट एड ट्रेनिंग: सभी कर्मियों को हीट स्ट्रेस के लक्षण पहचानने की ट्रेनिंग दी जाए। चिड़चिड़ापन, चक्कर आना या काम में मन न लगना इसके शुरुआती संकेत हैं।
चेतावनी: DGMS ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा नियमों में किसी भी तरह की लापरवाही पाए जाने पर खान अधिनियम (Mines Act) के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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