कोरबा | छत्तीसगढ़ में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच रेल यात्रियों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रायपुर से चलने वाली ट्रेनें हों या लंबी दूरी की एक्सप्रेस गाड़ियां, बिलासपुर से कोरबा के बीच आते-आते इनकी रफ्तार पर ब्रेक लग रहा है। आलम यह है कि महज कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में ट्रेनों को घंटों लग रहे हैं, जिससे यात्री उमस और गर्मी में बेहाल हैं।
सिग्नल और कॉशन के जाल में फंसी रफ्तार
रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए यात्रियों ने बताया कि ट्रेनों को कभी बिलासपुर स्टेशन पर ही लंबे समय तक रोक दिया जाता है, तो कभी रवाना होने के बाद गतौरा और जयरामनगर के बीच रेड सिग्नल थमा दिया जाता है।
यदि ट्रेन इन बाधाओं को पार कर चांपा तक पहुंच भी जाए, तो चांपा से कोरबा के बीच ‘गति अवरोध’ (कॉशन) मिलना लगभग तय होता है। कई बार ट्रेन उरगा तक तो समय पर पहुँचती है, लेकिन वहां से कोरबा स्टेशन की चंद किलोमीटर की दूरी तय करने में निर्धारित से कई गुना अधिक समय लग जाता है।
मालगाड़ियों को तरजीह, यात्री बेहाल
सूत्रों और यात्रियों के अनुसार, बिलासपुर डिवीजन में इस लेटलतीफी का मुख्य कारण मालगाड़ियों (Goods Trains) को प्राथमिकता देना है। कोयला लदी गाड़ियां हों या खाली रैक, उनके लिए रूट क्लियर रखा जाता है, जबकि सैकड़ों यात्रियों से भरी ट्रेनों को आउटर या छोटे स्टेशनों पर खड़ा कर दिया जाता है।
लिंक एक्सप्रेस का बुरा हाल
पिछले पांच दिनों का रिकॉर्ड देखें तो एक भी दिन ट्रेनें समय पर कोरबा नहीं पहुंचीं। विशेषकर लिंक एक्सप्रेस की स्थिति बेहद खराब रही:
- गुरुवार का हाल: ट्रेन दोपहर 1:23 बजे कोरबा पहुँची।
- बिलासपुर में देरी: 10 मिनट के स्टॉपेज की जगह गाड़ी को 16 मिनट खड़ा किया गया।
- चांपा-कोरबा की सुस्त रफ्तार: बिलासपुर से 10:51 बजे छूटने के बाद चांपा तक स्थिति सामान्य थी, लेकिन चांपा से कोरबा की छोटी सी दूरी तय करने में ट्रेन को 1 घंटा 10 मिनट लग गए।
पसीने से तर-बतर यात्री अब रेलवे प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि कम से कम इस भीषण गर्मी में तो समय का ध्यान रखा जाए।

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