कोरबा | छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार द्वारा 1 मई से 10 जून तक दूसरी बार ‘सुशासन तिहार’ मनाने की योजना पर सियासी पारा गरमा गया है। जिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष मुकेश कुमार राठौर ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार करते हुए इसे जनता के साथ “बेईमानी” करार दिया है।
“क्यूआर कोड में आज भी कार्य प्रगति पर”
मुकेश राठौर ने बताया कि मई 2025 में आयोजित पिछले सुशासन तिहार के दौरान कोरबा नगर निगम के सभी 67 वार्डों में हजारों आवेदन लिए गए थे। आवेदकों को क्यूआर कोड वाली पावती दी गई थी, ताकि वे अपने काम की स्थिति जान सकें। राठौर का आरोप है कि एक साल बीत जाने के बाद भी पोर्टल पर स्टेटस चेक करने पर केवल “कार्य प्रगति पर है” ही दिखाई देता है।
आंकड़ों के जरिए घेरा: 23 में से केवल 3 कार्य पूरे
खुद पार्षद होने के नाते श्री राठौर ने अपने वार्ड का उदाहरण देते हुए बताया:
- उन्होंने स्वयं विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए 9 आवेदन दिए थे।
- अन्य वार्ड वासियों (सुनीता राठौर, बसंत देवांगन, दिनेश पाण्डेय आदि) के आवेदनों को मिलाकर कुल 23 आवेदन जमा किए गए थे।
- इनमें से मात्र 3 कार्यों का निराकरण हो सका है, जबकि 20 कार्य अब भी लंबित हैं।
“मैं वार्ड क्रमांक 19 से कांग्रेस का पार्षद और शहर अध्यक्ष हूँ, कहीं यही कारण तो नहीं कि मेरे वार्ड को उपेक्षित रखा जा रहा है? रोड, नाली, बिजली और सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए जनता आज भी भटक रही है।” — मुकेश राठौर, शहर अध्यक्ष, जिला कांग्रेस
कांग्रेस की मांग: पहले पुराना हिसाब, फिर नया शिविर
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि चिलचिलाती धूप में दोबारा शिविर लगाकर जनता और कर्मचारियों को परेशान करना केवल एक “राजनैतिक प्रचार” और “औपचारिकता” है। जिला कांग्रेस और विपक्षी पार्षदों की प्रमुख मांगें हैं:
- पिछले साल के सुशासन तिहार का लेखा-जोखा सार्वजनिक किया जाए।
- कुल प्राप्त, निराकृत और लंबित आवेदनों का डेटा प्रस्तुत किया जाए।
- पुराने आवेदनों के पूर्ण निराकरण के बाद ही नए शिविर लगाए जाएं।
राठौर ने अंत में कहा कि जनता को कतार में खड़ा करना सुशासन नहीं, बल्कि कुशासन है। पारदर्शिता के बिना दोबारा शिविर लगाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

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