कोरबा | राज्य शासन के आदेश के बावजूद कोरबा जिले के राशन कार्ड उपभोक्ताओं को फिलहाल तीन महीने का कोटा एक साथ नहीं मिल पाएगा। भंडारण की कमी और लॉजिस्टिक समस्याओं के चलते उपभोक्ताओं को राशन दुकानों के चक्कर काटने पड़ेंगे।
शासन का आदेश बनाम जमीनी हकीकत
छत्तीसगढ़ शासन ने अप्रैल महीने में उपभोक्ताओं को एक साथ तीन महीने (अप्रैल, मई और जून) का चावल देने का निर्देश दिया था। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गोदामों को खाली करना और उपभोक्ताओं को राहत देना था। लेकिन, कोरबा जिले की 554 उचित मूल्य दुकानों में पर्याप्त जगह न होने के कारण यह योजना फिलहाल अटक गई है।
दोबारा लगानी होगी लंबी कतारें
खाद्य विभाग के अनुसार, अभी केवल अप्रैल माह का ही चावल वितरित किया जा रहा है। शेष दो महीनों (मई और जून) के राशन के लिए हितग्राहियों को दोबारा दुकानों पर कतार लगानी होगी। जिले के लगभग 3.50 लाख उपभोक्ता इस अव्यवस्था से प्रभावित हो रहे हैं।
वितरण प्रणाली में गड़बड़ी के मुख्य कारण:
- भंडारण की समस्या: राशन दुकानों में इतना स्थान नहीं है कि तीन महीने का स्टॉक एक साथ रखा जा सके।
- तकनीकी खामियां: जनवरी से ही वितरण व्यवस्था प्रभावित है। फरवरी का चावल मार्च में बांटे जाने के कारण पूरा शेड्यूल बिगड़ गया है।
- समय सीमा का दबाव: हर महीने की अंतिम तिथि तक राशन न लेने पर आवंटन ‘लैप्स’ हो जाता है, जिससे बचने के लिए हड़बड़ी मची रहती है।
- शिकायतों का अंबार: कई दुकान संचालक आवंटन बचाने के लिए उपभोक्ताओं से पहले ही ‘थंब इम्प्रेशन’ (अंगूठा) लगवा लेते हैं, जिसकी शिकायतें लगातार प्रशासन तक पहुँच रही हैं।
चना और शक्कर के लिए भी इंतजार
सिर्फ चावल ही नहीं, बल्कि चना, शक्कर और नमक के भंडारण में भी दिक्कतें आ रही हैं। उपभोक्ताओं को इन आवश्यक वस्तुओं के लिए भी बार-बार दुकान के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। खाद्य विभाग का कहना है कि पहले अप्रैल का कोटा पूरा होने के बाद ही अगले महीनों का वितरण सुचारू किया जाएगा।

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