कोरबा | ऑनलाइन दवाओं की बिक्री (e-Pharmacy) के खिलाफ अब आर-पार की जंग शुरू हो गई है। छत्तीसगढ़ केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर एसोसिएशन (CCDA) ने केंद्र सरकार की नीतियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के निर्देश पर आगामी 11 मई को देशभर की सभी दवा दुकानें बंद रखने का निर्णय लिया गया है।
जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा: उमेश सिरोठिया
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सीसीडीए के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिरोठिया ने कहा कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री केवल व्यापार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने ई-फार्मेसी की कमियों पर प्रकाश डालते हुए निम्नलिखित बिंदु रखे:
- गुणवत्ता और भंडारण: ऑनलाइन सप्लाई चेन में दवाओं के सही तापमान और सुरक्षित भंडारण की कोई गारंटी नहीं होती।
- पर्चे का सत्यापन: मेडिकल पर्चों के डिजिटल सत्यापन की ठोस व्यवस्था न होने से नशीली और प्रतिबंधित दवाओं के दुरुपयोग का खतरा बढ़ गया है।
- पारदर्शिता का अभाव: स्थानीय केमिस्ट औषधि नियंत्रण विभाग की सीधी निगरानी में होते हैं, जबकि ऑनलाइन पोर्टल्स पर नियंत्रण करना कठिन है।
बालको प्रबंधन और ‘टाटा 1MG’ के बीच अनुबंध पर उठे सवाल
सिरोठिया ने विशेष रूप से बालको प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन ने दवाओं की आपूर्ति के लिए ‘टाटा 1MG’ जैसी ऑनलाइन संस्था के साथ गोपनीय अनुबंध किया है।
“स्थानीय विक्रेताओं की तुलना में ऑनलाइन माध्यम से अधिक कीमतों पर दवाएं बेची जा रही हैं, जिसका सीधा आर्थिक बोझ निर्दोष श्रमिकों और आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।” — उमेश सिरोठिया
12.50 लाख केमिस्ट दिखाएंगे अपनी ताकत
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि इस ‘मनमानी’ को रोकने के लिए देश के करीब 12.50 लाख दवा विक्रेता एकजुट हैं। अकेले छत्तीसगढ़ के 18,000 केमिस्ट इस बंद में शामिल होकर अपनी दुकानें बंद रखेंगे। संगठन ने सरकार से मांग की है कि मरीजों की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ई-फार्मेसी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।

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