कोरबा | बुधवार को पंडित जवाहरलाल नेहरू सभागार में आयोजित नगर निगम का विशेष सम्मिलन हंगामे की भेंट चढ़ गया। महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच जमकर तीखी नोकझोंक हुई। जहाँ सत्ता पक्ष ने कांग्रेस पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाया, वहीं विपक्ष ने वर्तमान बिल को लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।
दो महत्वपूर्ण प्रस्ताव हुए पारित
सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने जानकारी दी कि सम्मिलन में मुख्य रूप से दो प्रस्तावों पर चर्चा की गई और उन्हें पारित किया गया:
- निंदा प्रस्ताव: महापौर द्वारा महिला आरक्षण बिल का विरोध करने वाले दलों के खिलाफ लाया गया।
- 50% आरक्षण की मांग: निर्दलीय पार्षद दल द्वारा सभी सदनों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव।

महापौर का प्रहार: “कांग्रेस हमेशा से महिला विरोधी”
महापौर संजूदेवी राजपूत ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिला सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठा रहे हैं, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दल हमेशा इसमें रोड़ा अटकाते हैं। उन्होंने ‘तीन तलाक’ का उदाहरण देते हुए कहा कि विपक्षी दल केवल राजनीति कर रहे हैं। महापौर ने तर्क दिया कि यदि नए परिसीमन से महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिलता है, तो विपक्ष को इसमें आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
विपक्ष का पलटवार: “पास हो चुके बिल को लागू क्यों नहीं कर रही सरकार?”

दूसरी ओर, पार्षद और कांग्रेस जिला अध्यक्ष मुकेश राठौर ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
“जब वर्ष 2023 में महिला आरक्षण बिल पास हो चुका है और राष्ट्रपति का अनुमोदन भी मिल गया है, तो उसे तत्काल लागू क्यों नहीं किया जा रहा? नए परिसीमन और जनगणना के नाम पर इसे लटकाया जा रहा है। क्या सरकार ने इसके लिए कोई आवश्यक सर्वे पूरा किया है?”
दिन भर रही गहमागहमी
विशेष सम्मिलन के दौरान सदन का माहौल काफी गर्म रहा। दोनों ही पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सत्ता पक्ष जहाँ इसे मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी स्टंट करार देते हुए जनगणना और परिसीमन की पेचीदगियों पर घेराबंदी कर रहा है।

7974214821


