कोरबा | जिले में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हुई बढ़ोतरी का असर अब स्थानीय बाजार में साफ दिखाई देने लगा है। ईंधन के दाम बढ़ते ही परिवहन खर्च (मालभाड़ा) में भारी इजाफा हो गया है। इसका सीधा असर आम जनता की रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर बुनियादी निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है। किराना, सब्जी, सीमेंट और सरिया जैसी आवश्यक सामग्रियों के दाम बढ़ने से आम आदमी का मासिक बजट पूरी तरह चरमरा गया है।
🚚 मालभाड़ा बढ़ने से खुदरा बाजार में बढ़ीं कीमतें
व्यापारियों और वाहन संचालकों का कहना है कि ईंधन महंगा होने के बाद ट्रक, मिनी ट्रक और अन्य मालवाहक वाहनों के किराए में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बाहर से आने वाले माल पर अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा भाड़ा देना पड़ रहा है।
व्यापारियों का पक्ष: “लागत बढ़ने के कारण खुदरा बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ाना हमारी मजबूरी बन गई है। मालभाड़ा बढ़ने से न सिर्फ जनता परेशान है, बल्कि छोटे व्यापारियों का मुनाफा भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।”
🍳 रसोई पर सबसे बड़ी मार, थाली से गायब हो रही राहत
ईंधन की आसमान छूती कीमतों ने आम आदमी की रसोई पर सबसे तीखा प्रहार किया है। थोक मंडियों से आने वाली खाद्य सामग्रियों का परिवहन खर्च बढ़ने से दाल, तेल, चावल और हरी सब्जियों के दामों में लगातार तेजी देखी जा रही है।
मध्यमवर्गीय परिवारों का कहना है कि सीमित आय में अब घर का मासिक खर्च चलाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। बचत के रास्ते पूरी तरह बंद हो चुके हैं।
🏗️ घर बनाना हुआ महंगा, निर्माण कार्य पड़े अधर में
पेट्रोल-डीजल की इस मार से निर्माण क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा है। बाजार में बुनियादी निर्माण सामग्रियों की कीमतें आसमान छू रही हैं:
- प्रभावित सामग्रियां: सीमेंट, सरिया, गिट्टी, रेत और ईंट।
- ठेकेदारों का तर्क: मजदूरी और परिवहन लागत बढ़ने के कारण निर्माण दरों में इजाफा करना जरूरी हो गया था।
ग्रामीण इलाकों में संकट:
शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी सामग्री पहुंचाने का खर्च बढ़ गया है। परिवहन महंगा होने की वजह से कई छोटे और निजी निर्माण कार्य बीच में ही अटक गए हैं, जिससे नया मकान बनाने की चाह रखने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

7974214821


