कोरबा। एसईसीएल (SECL) के कुसमुंडा कोयला खदान क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जहाँ शनिवार को एक बहुत बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहाँ नीलकंठ कंपनी का एक विशालकाय डंपर अनजाने में ऊपर से गुजर रही बिजली की हाई-टेंशन (HT) लाइन की चपेट में आ गया। गनीमत यह रही कि उस वक्त लाइन में विद्युत सप्लाई बंद थी, जिसके कारण डंपर चालक की जान बाल-बाल बच गई।
टायरों और डाला बॉडी के बीच फंसा तार
जानकारी के मुताबिक, नीलकंठ कंपनी के अधीन कार्यरत डंपर ऑपरेटर लकी यादव (निवासी: ग्राम पाली) रोजाना की तरह खदान क्षेत्र में काम कर रहा था। इसी दौरान डंपर का ऊपरी हिस्सा वहाँ से गुजर रहे बिजली के हाईटेंशन तार से उलझ गया।
घटना के तुरंत बाद मौके पर हड़कंप मच गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने देखा कि बिजली का भारी-भरकम तार डंपर के पिछले टायरों और डाला बॉडी के बीच बुरी तरह फंस चुका था।
चश्मदीदों का कहना है: “अगर उस वक्त लाइन चालू होती, तो पूरे डंपर में करंट फैल जाता और एक बड़ा ब्लास्ट या भीषण हादसा हो सकता था, जिसमें ऑपरेटर लकी यादव की जान जाना तय था।”
प्रबंधन और सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने एसईसीएल (SECL) प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। खदान क्षेत्र, जहाँ चौबीसों घंटे भारी वाहनों और मशीनों की आवाजाही रहती है, वहाँ इतनी कम ऊंचाई पर हाई-टेंशन लाइन का होना सीधे तौर पर सुरक्षा मानकों का घोर उल्लंघन है।
कर्मचारियों में आक्रोश, सुपरवाइजरों पर लापरवाही का आरोप
घटनास्थल पर मौजूद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सीधे तौर पर वहाँ तैनात सुपरवाइजरों और प्रबंधन की लापरवाही का नतीजा है।
- देर से जागा अमला: घटना के बाद आनन-फानन में सुरक्षा अधिकारियों को सूचना दी गई, जिसके बाद तार को डंपर से सुरक्षित अलग करने का काम शुरू हुआ।
- प्रमुख मांग: स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने उग्र नाराजगी जताते हुए मांग की है कि खदान क्षेत्रों में इस तरह के जानलेवा हादसों को रोकने के लिए सभी बिजली तारों को तुरंत पर्याप्त और सुरक्षित ऊंचाई पर शिफ्ट किया जाए।

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